ओडिशा-मध्य प्रदेश में आदिवासी आंदोलन, वेदांता और अडानी पर आरोपों की पूरी पड़ताल

ओडिशा: सिजिमाली में पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने

रायगड़ा के काशीपुर इलाके में सिजिमाली बॉक्साइट खदान के लिए बन रही 3 किमी लंबी पहुंच सड़क को लेकर पुलिस और आदिवासियों में झड़प हुई। इसमें कम से कम 40 पुलिसकर्मी और 25 ग्रामीण घायल हुए। खदान लगभग 311 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता का बॉक्साइट होने का अनुमान है। यह खनन ब्लॉक मार्च 2023 में वेदांता को 50 साल की लीज़ पर दिया गया था। आदिवासियों की मुख्य आपत्ति कानूनी प्रक्रिया पर है। वन अधिकार कानून 2006 और पेसा 1996 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में वन भूमि के डायवर्जन से पहले ग्राम सभा की मंज़ूरी ज़रूरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जल्दबाज़ी में बुलाई गई ग्राम सभाओं के ज़रिये मंज़ूरी दिखाई गई। पहाड़ी को कंध और पारोजा समुदाय पवित्र मानते हैं। इसी बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने परियोजना को पर्यावरण मंज़ूरी की सिफ़ारिश कर दी है, जबकि L&T की चुनौती वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। पर्यावरण मंज़ूरी की सिफ़ारिश की यह रिपोर्ट अप्रैल 2026 की है। उसके बाद की ताज़ा स्थिति मैं पुष्ट नहीं कर पाया।

मध्य प्रदेश: कोसमी गांव का मामला

आपके दिए दस्तावेज़ के अनुसार सीहोर के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई में आदिवासियों के घर गिराए गए और फसलें नष्ट हुईं। इसके बाद भोपाल तक पदयात्रा निकली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराज़गी जताई और मुख्यमंत्री मोहन यादव से बैठक के बाद जांच के आश्वासन पर यात्रा स्थगित हुई। मेरी खोज में इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि या ताज़ा अपडेट नहीं मिला, इसलिए प्रकाशन से पहले किसी स्थानीय रिपोर्ट से मिलान कर लें।

अडानी और ज़मीन: आरोप क्या हैं, और क्या साबित है

विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है। कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने सिंगरौली में अडानी को कोयला खदानें देने में पेसा और पर्यावरण नियमों की अनदेखी का दावा किया। झारखंड के गोड्डा बिजली प्रोजेक्ट पर एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट ने बिना सहमति ज़मीन अधिग्रहण की बात कही। असम में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आदिवासी ज़मीन के आवंटन पर सवाल उठाए, जबकि अडानी समूह ने उस सीमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ाव से इनकार किया। ओडिशा के गंधमर्दन मामले में धर्मेंद्र प्रधान ने बीजद के आरोपों को निराधार बताया। एक बात ज़रूरी है। मुझे ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें अडानी के ज़मीन मामलों में भाजपा नेता अदालत में दोषी ठहराए गए हों या कानूनी रूप से “फंसे” हों। जो मिला, वे ज़्यादातर विपक्ष और सिविल सोसाइटी के आरोप हैं, जिन्हें सरकार और कंपनियां खारिज करती हैं।

क्या यह सिर्फ़ भाजपा की समस्या है?

तथ्य इस सवाल का एकतरफ़ा जवाब नहीं देते:

सिजिमाली की नीलामी फरवरी 2023 में हुई। उस समय ओडिशा में बीजद की सरकार थी। अब भाजपा के मोहन माझी (राज्य के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री) की सरकार उसे आगे बढ़ा रही है। नियमगिरि (2013) में सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम सभा की मंज़ूरी अनिवार्य की। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में विरोध कांग्रेस शासन के दौरान भी चला, यह मेरी सामान्य जानकारी है। खनिज-समृद्ध आदिवासी इलाके ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हैं। इसलिए टकराव वहीं ज़्यादा दिखता है, चाहे सरकार किसी की हो।भाजपा-शासित राज्यों के आलोचकों का तर्क है कि वहां विकास और निवेश का मॉडल ज़्यादा सख्ती से लागू होता है और विरोध करने वालों पर कार्रवाई होती है। भाजपा का पक्ष है कि खनन से रोज़गार, राजस्व और विकास आता है और विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है। दोनों तर्क बहस का हिस्सा हैं, और अंतिम फ़ैसला अदालतों और जांच से ही होगा।

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