नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 12 अक्टूबर के आचरण पर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि राहुल गांधी को इस बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।
यह सुनवाई अक्टूबर 10 को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो-ट्रेन सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों, इंटरनेट सस्पेंशन और कथित अवैध हिरासत से जुड़े अवमानना व बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के साथ-साथ राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक नेताओं द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ऑफ इलेक्टोरल रोल्स में कथित बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाने और अनियमितताओं के खिलाफ दायर याचिका पर हो रही है।
12 अक्टूबर का मार्च और याचिका
12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ निकाला था। संविधान क्लब से शुरू हुए इस जुलूस में प्रियंका गांधी वाद्रा, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेता शामिल थे। पुलिस बैरिकेडिंग के बावजूद नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और SIR प्रक्रिया तथा CEC ज्ञानेश कुमार के कथित मनमाने फैसलों के खिलाफ याचिका दायर की। याचिका में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र ऑडिट समिति बनाने, SIR को अंतरिम रूप से स्थगित करने और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड्स का खुलासा करने की मांग की गई है। याचिका में ECI, CEC ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है।
पुलिस और प्रशासन की माफी
सुनवाई से पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में अयोग्य और बिना शर्त माफी पेश की। पुलिस आयुक्त ने अफिडेविट में कहा कि 10 अक्टूबर के प्रतिबंध जानबूझकर या जान-बूझकर अदालत के आदेशों का उल्लंघन नहीं थे। उन्होंने CJP के पिछले आचरण (जुलाई में संसद मार्च और हिंसा के आरोप) का हवाला देते हुए लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाने का दावा किया। मेट्रो की 45 स्टेशनों पर प्रवेश-निकास प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे रात 10 बजे हटा लिया गया। DMRC ने भी माफी दी और बताया कि पूरी नेटवर्क कभी बंद नहीं हुई। अदालत ने पहले ही 9 और 11 अक्टूबर को मेट्रो-ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद न करने, पत्रकारों-वकीलों के काम में बाधा न डालने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने के निर्देश दिए थे।
अन्य मुद्दे
– महाराष्ट्र में SIR के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाने का मुद्दा भी मुख्य SIR याचिकाओं के साथ सुना जाएगा।
– पत्रकारों और वकीलों के कथित उत्पीड़न, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने तथा मीडिया संगठनों की याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं।
– दिल्ली पुलिस ने CJP को अनुमति न देने का बचाव करते हुए उनके पिछले ‘आक्रामक’ प्रदर्शनों का जिक्र किया। सुनवाई जारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन कोर्ट के कामकाज में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। विपक्ष ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार और चुनाव आयोग इसे वैध प्रक्रिया बताते हैं।
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