वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने और शिखर के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने संबंधी सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा कुछ समाचार पत्रों में प्रसारित खबरों को मंदिर प्रशासन ने बुधवार को पूरी तरह भ्रामक और निराधार करार दिया है। मंदिर न्यास ने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हुए शिखर का हिस्सा मंदिर के लॉकर में यथास्थिति सुरक्षित रखा गया है।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस वर्ष अप्रैल में श्री काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य (उत्तर-पश्चिम) कोण पर स्थापित शिखर का एक हिस्सा प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हो गया था। उक्त क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित निकालकर मंदिर के लॉकर में यथास्थिति रखा गया है। उन्होंने कहा कि सोना गायब होने या शिखर के गंभीर रूप से ध्वस्त होने संबंधी प्रसारित खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
वाराणसी मंडलायुक्त एवं मंदिर कार्यपालक समिति के अध्यक्ष एस. राजलिंगम ने भी इन खबरों का खंडन किया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर मंदिर के शिखर, गुंबद या कलश से सोना गायब होने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और असत्य हैं। मंडलायुक्त के अनुसार, कुछ महीने पहले ओलावृष्टि या बंदरों की उछल-कूद के दौरान मंदिर के उत्तरी द्वार/प्रवेश द्वार के ऊपर स्थित गुंबद या छोटे स्वर्ण कलश का एक हिस्सा गिर गया था, जिसे मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित अभिरक्षा में रख लिया है।
यह विवाद तब बढ़ा जब वाराणसी के तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने सितंबर 2026 के अंत में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), मुख्यमंत्री कार्यालय, मंडलायुक्त और मंदिर प्रशासन को शिकायत भेजी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के उत्तरी द्वार के ऊपर दो स्थानों पर स्वर्ण कलश गायब हैं तथा शिखर के कई हिस्सों (लगभग 8-10 स्थानों) से सोने की प्लेटें गायब नजर आ रही हैं या उनके स्थान पर पेंट किया गया है। PMO ने शिकायत पर संज्ञान लिया था।
मंदिर न्यास ने मंदिर की धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता को देखते हुए संरक्षण कार्य को प्राथमिकता दी है। इस संबंध में आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम ने जुलाई 2026 में स्थलीय निरीक्षण कर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर एवं लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले क्षरण का उल्लेख करते हुए विस्तृत तकनीकी जांच और माइक्रो-एनालिसिस की सिफारिश की गई है। मंदिर प्रशासन ने कहा कि संरक्षण एवं मरम्मत के लिए आईआईटी मद्रास से परामर्श जारी है, ताकि मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप अक्षुण्ण रहें। विशेषज्ञ टीम के अक्टूबर-नवंबर 2026 में आगे के निरीक्षण की संभावना है। रिपोर्ट के आधार पर ही मरम्मत का कार्य किया जाएगा। मंदिर न्यास और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अनधिकृत और अफवाह वाली खबरों पर विश्वास न करें तथा सत्यापित जानकारी पर ही ध्यान दें। मंदिर का स्वर्ण और अन्य मूल्यवान संपत्ति सुरक्षित अभिरक्षा में है।

