नई दिल्ली। भारत के कई राज्यों में रात के समय बिजली की आपूर्ति कम होने से पावर संकट गहरा गया है। आउटेज से बचने के लिए राजस्थान, गुजरात समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली आवंटन की मांग की है। दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, राजस्थान और गुजरात जैसे अक्षय ऊर्जा में अग्रणी राज्यों के साथ महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली ने भी अतिरिक्त बिजली की मांग की है।
केंद्र सरकार के पास आमतौर पर कोयला और हाइड्रोपावर प्लांट से करीब 14 से 15 गीगावाट बिजली होती है, जिसे राज्यों में कम आपूर्ति के समय आवंटित किया जा सकता है। लेकिन इस बार अल नीनो के प्रभाव से कम बारिश के कारण हाइड्रोपावर उत्पादन घटा है, जिससे उपलब्ध बिजली सीमित हो गई है। पंजाब को पहले ही अतिरिक्त बिजली दी जा चुकी है, जहां सितंबर में कुछ क्षेत्रों में 14 घंटे तक बिजली कटौती हुई थी।
सितंबर में देश में बिजली की कमी 560 मिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन में सालाना 13.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि हाइड्रोपावर उत्पादन में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ग्रिड इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, करीब 41 गीगावाट क्षमता के प्लांट बंद हैं और लगभग 47 प्रतिशत कोयला प्लांट में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई कोयला प्लांट में मेंटेनेंस चल रहा है, हाइड्रो और विंड पावर कमजोर है तथा औद्योगिक मांग अधिक होने से आपूर्ति दबाव में है। राज्यों ने भी सालभर की बिजली खरीद की योजना ठीक से नहीं बनाई थी। पावर मिनिस्ट्री अक्षय ऊर्जा उत्पादकों को बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने पर जोर दे रही है, ताकि दिन में पैदा होने वाली सोलर बिजली रात में इस्तेमाल की जा सके।

