5 करोड़ देकर विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम का दावा झूठ या सच? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

मथुरा/वृंदावन, श्री हित राधा केली कुंज आश्रम (प्रेमानंद महाराज का आश्रम) को लेकर नया विवाद सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी (फलाहारी महाराज) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में सनसनीखेज दावा किया है कि एक गुट ने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाया था। उनका आरोप है कि यह कदम महाराज को प्रसिद्ध करने और निजी हितों के लिए उठाया गया।

फलाहारी महाराज के अनुसार, राजस्थान की एक निजी कंपनी से जुड़े लोगों ने विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के प्रचार के नाम पर 5 करोड़ रुपये देने की पेशकश की या खर्च किए। इसके बाद महाराज की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। अब उसी गुट के कुछ लोग साधु वेश में आश्रम में घुस चुके हैं और प्रॉपर्टी तथा जमीन से जुड़े काम कर रहे हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि ये लोग यमुना डूब क्षेत्र की जमीनों की खरीद-फरोख्त में भी शामिल हैं। फलाहारी ने प्रेमानंद महाराज से बेलवन आश्रम छोड़कर गोवर्धन गिरिराज जी में रहने की अपील भी की है और सीबीआई जांच तथा महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। महामंडलेश्वर श्री राधा नंद गिरी भी इस पत्र से जुड़े बताए गए हैं। फलाहारी ने कहा कि वे प्रेमानंद महाराज को अपनी किडनी देने को तैयार हैं क्योंकि वे सनातन धर्म के लिए जरूरी हैं, लेकिन कुछ माफिया उनके नाम को बदनाम कर रहे हैं।

विराट कोहली और प्रेमानंद महाराज की मुलाकातें: क्या है सच्चाई?

विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा प्रेमानंद महाराज से कई बार मिल चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पहली मुलाकात 4 जनवरी 2023 को वृंदावन में हुई थी। इसके बाद 2025 में परिवार के साथ और जून 2026 में आईपीएल खिताब जीतने के बाद भी दोनों आश्रम पहुंचे थे। तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें दोनों माथे पर तिलक लगाए, हाथ जोड़कर आशीर्वाद लेते दिखते हैं। यह मुलाकातें वास्तविक हैं और अच्छी तरह दस्तावेजीकृत हैं। आश्रम में दर्शन निःशुल्क बताए जाते हैं।

5 करोड़ का दावा: फैक्ट चेक क्या कहता है?

स्वतंत्र फैक्ट-चेक रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि 5 करोड़ रुपये के भुगतान या ऑफर का कोई स्वतंत्र प्रमाण—जैसे बैंक ट्रांजेक्शन, कॉन्ट्रैक्ट या आधिकारिक पुष्टि—अभी तक सामने नहीं आया है। विराट कोहली या उनके पक्ष से भी कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल “आरोप” या “दावा” ही माना जा सकता है, स्थापित तथ्य नहीं। NDTV समेत कई मीडिया आउटलेट्स ने स्पष्ट किया है कि वे इस सनसनीखेज आरोप की पुष्टि नहीं करते। दावा फलाहारी महाराज के पत्र पर आधारित है और रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की संदिग्ध मौत के बाद आश्रम को लेकर उठे व्यापक विवाद के बीच आया है।

पृष्ठभूमि और अन्य आरोप

पत्र में आश्रम के आसपास जमीन संबंधी गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। फलाहारी ने दावा किया कि साधु वेशधारी गुट यमुना डूब क्षेत्र की जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहा है। कुछ रिपोर्टों में गुमशुदा बच्चों और किडनी से जुड़े आरोपों का भी जिक्र है, जिनकी जांच की मांग की गई है। दिनेश फलाहारी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। इससे पहले भी उनके नाम कुछ विवाद जुड़े रहे हैं, लेकिन वर्तमान दावा आश्रम की आंतरिक गतिविधियों और बाहरी प्रभावों पर केंद्रित है।

अभी तक आश्रम पक्ष, विराट कोहली या संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू होने या पत्र पर कार्रवाई का इंतजार है। यह मामला धार्मिक स्थलों पर बाहरी प्रभाव, प्रॉपर्टी विवाद और सेलिब्रिटी जुड़ाव के बीच की जटिलताओं को रेखांकित करता है। आगे की जांच से ही दावों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।

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