ग्रेटर नोएडा/सूरजपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (शुक्रवार, 2 अक्टूबर) पर गौतमबुद्धनगर के जिला मुख्यालय सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट पर सवर्ण स्वाभिमान मंच ने तीन घंटे का मौन उपवास रखा। मंच ने UGC रोलबैक, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और SC/ST एक्ट में कानूनी संशोधन की मांग उठाई। उपवास के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया।
सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला उपवास
मंच के पदाधिकारी और समर्थक सुबह 10 बजे से कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे और मौन उपवास शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग जुड़ते गए। दोपहर एक बजे तक प्रदर्शनकारी बैठे रहे और धरनास्थल पर देशभक्ति के गीत बजते रहे। रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के अनुसार ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
क्या हैं मंच की मांगें
उपवास समाप्त होने के बाद मंच के संयोजक कपिल शर्मा ने कहा कि सरकार ने मनमाने तरीके से यूजीसी लागू किया है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरक्षण को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर लागू करने, एससी-एसटी एक्ट में कानूनी संशोधन करने और ईडब्ल्यूएस की प्रक्रिया सरल बनाने की मांग की। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर सुनवाई न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
पुलिस द्वारा रोकने का आरोप
मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए दादरी पुलिस ने वरिष्ठ नेता पीतांबर शर्मा के आवास पर परमानंद शर्मा और रामकुमार शर्मा को दोपहर दो बजे तक रोके रखा। कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी घरों पर रोके जाने का आरोप लगाया गया, जिन्हें दोपहर दो बजे के बाद छोड़ा गया। इस आरोप पर पुलिस-प्रशासन का पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
पहले से चल रही थी तैयारी
यह कार्यक्रम अचानक नहीं हुआ। चेतना मंच के अनुसार ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में हुई बैठक में आरक्षण व्यवस्था में संशोधन, UGC के नए प्रावधानों के रोलबैक और SC/ST Act में कानूनी सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा के बाद नया सामाजिक मंच बनाया गया था। इससे पहले 30 अगस्त की बैठक में 16 सितंबर 2026 को दादरी से सूरजपुर कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय हुआ था। जिला कचहरी के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने भी सूरजपुर पहुंचकर “UGC रोल बैक” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा था। मंच के नेता पीताम्बर शर्मा का कहना रहा है कि उनकी लड़ाई किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है।
पृष्ठभूमि: UGC नियम और सुप्रीम कोर्ट का स्टे
UGC (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 13 जनवरी को अधिसूचित हुए थे और इनमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को भेदभाव की शिकायतें देखने के लिए “इक्विटी कमेटी” बनाने का प्रावधान है। विरोध करने वालों का तर्क था कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा में सामान्य और गैर-आरक्षित वर्ग संस्थागत संरक्षण से बाहर रह गए।
29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन विनियमों को स्थगित (abeyance) कर दिया। अदालत ने इन्हें प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताया और 2012 के UGC विनियमों को लागू रखने का आदेश दिया। देल्ही लॉ एकेडमी के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार 2026 के विनियम फिलहाल स्थगित हैं और मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। यानी कानूनी रूप से मामला अदालत में है, जबकि सड़क पर विरोध जारी है। इन आंदोलनों की खबरें मऊ जैसे अन्य जिलों से भी आई हैं।
दूसरा पक्ष: समर्थकों का कहना है कि UGC के नए नियम जाति-आधारित भेदभाव, खासकर कैंपस में, रोकने के लिए लाए गए थे और 2012 के नियम मुख्यतः सलाहकारी थे। SC/ST एक्ट के पक्षधर इसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा का जरूरी कानून मानते हैं। आरक्षण पर आर्थिक आधार की मांग संवैधानिक और राजनीतिक बहस का विषय है।
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