नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की छात्राओं ने पिछले एक सप्ताह में कई मार्च निकाले। इनमें लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), मिरांडा हाउस, गार्गी कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज की छात्राएं शामिल रहीं। ‘हम औरतें आजाद हैं’, ‘क्यूटी नहीं, क्रांति हूं’, ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ जैसे नारे अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
क्या थी घटना और क्यों भड़का गुस्सा?
21 सितंबर 2026 को कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में तीन युवकों ने 17 वर्षीय लड़की से कथित तौर पर दुष्कर्म किया। आरोप है कि युवक पुलिसकर्मी बनकर आए थे। यह पार्क LSR कॉलेज से महज दो किलोमीटर दूर है। घटना के बाद LSR प्रशासन ने सावधानी के तौर पर कुछ दिनों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन कर दीं। छात्राओं ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। परिसर के आसपास अंधेरी सड़कें, बंद पिंक्थ बूथ, कम पुलिस गश्त और लगातार छेड़छाड़ की शिकायतें सालों से चल रही हैं। कई छात्राओं ने 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड का जिक्र करते हुए कहा, “उसके बाद भी कुछ नहीं बदला।”
एक सप्ताह में कई मार्च
23 सितंबर: LSR के पास पहला बड़ा मार्च। करीब 200 छात्राएं शामिल हुईं। कई ने चेहरे पर स्कार्फ या मास्क लगाए क्योंकि उन्हें प्रशासन की कार्रवाई का डर था। नारे लगे—“डाउन विद पैट्रिआर्की” और “आजादी”।
25 सितंबर: कमला नेहरू कॉलेज से शुरू हुआ मार्च। LSR, गार्गी, मिरांडा हाउस की छात्राएं शामिल। सiri फोर्ट रोड पर मांगों का चार्टर तैयार करने की बैठक भी हुई।
28 सितंबर: मिरांडा हाउस की छात्राओं के नेतृत्व में सबसे बड़ा मार्च। बारिश के बावजूद सैकड़ों छात्राएं नॉर्थ कैंपस में मिरांडा हाउस गेट नंबर 7 से आर्ट्स फैकल्टी तक पहुंचीं। विवेकानंद मूर्ति के पास जमा हुईं। मार्च सिर्फ महिलाओं और क्वियर समुदाय के लिए खुला था।
इस दौरान पोस्टरों पर लिखा था—“थैंक यू फॉर ऑनलाइन क्लासेस, वी प्रेफर सेफ रोड्स”, “इट्स नॉट अ वुमेंस सेफ्टी इश्यू, इट्स अ मेल वायलेंस इश्यू”, “बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो”, “गर्ल्स जस्ट वाना हैव फंडामेंटल राइट्स”।
वायरल नारे और पोस्टर
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इन नारों की हो रही है:
“हम औरतें आजाद हैं”
“क्यूटी नहीं, क्रांति हूं”
“एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा”
“हमारी स्कर्ट नहीं छोटी, इन मर्दों की सोच छोटी”
“रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं”
“पिंजरा तोड़ना नहीं छोड़ेंगे”
ये नारे सिर्फ गुस्सा नहीं, महिलाओं की आजादी और सार्वजनिक जगहों पर उनके अधिकार की मांग हैं। छात्राओं का साफ कहना है कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को घर में बंद करना समाधान नहीं है। सड़कें, पार्क, बसें और रोशनी बेहतर होनी चाहिए।
मांगें क्या हैं?
छात्राओं ने प्रशासन और पुलिस से ये मांगें रखीं:
सड़कों, पार्कों और परिसर के आसपास बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग
नियमित पुलिस गश्त और काम करने वाले पिंक्थ बूथ
ज्यादा DTC बसें और शटल सेवा
सार्वजनिक शौचालय और मेंस्ट्रुअल हेल्थ सुविधाएं
महिलाओं पर पाबंदी लगाने के बजाय अपराधियों पर सख्ती
LSR स्टूडेंट्स यूनियन प्रेसिडेंट अनुषा गर्ग ने बताया कि पुलिस ने गश्त बढ़ाई है और कुछ जगहों पर रोशनी सुधारने का काम शुरू हुआ है। लेकिन छात्राएं कहती हैं कि सिर्फ अस्थायी कदम काफी नहीं।
राजनीतिक और छात्र संगठन
मार्च छात्र-नेतृत्व वाला था और किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा। ABVP-नेतृत्व वाले डीयूएसयू ने महिला सुरक्षा मार्च का समर्थन किया। वहीं, विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी छात्राओं के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि समाधान महिलाओं को घर में बंद करना नहीं, बल्कि सड़कों को सुरक्षित बनाना और अपराधियों को सजा देना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?
डीयू की छात्राओं का यह सिलसिला सिर्फ एक घटना का विरोध नहीं है। यह राजधानी में महिलाओं की रोजमर्रा की असुरक्षा, पितृसत्तात्मक सोच और व्यवस्था की नाकामी के खिलाफ आवाज है। कई छात्राएं कहती हैं कि वे डर के साथ जीना नहीं चाहतीं। “हम अपनी आजादी की कीमत सुरक्षा से नहीं चुकाएंगी।” बारिश में भीगते हुए, पोस्टर लेकर सड़क पर उतरती ये युवा महिलाएं अब सिर्फ नारे नहीं लगा रही हैं। वे एक सवाल पूछ रही हैं—क्या 2026 में भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस करने के लिए प्रदर्शन करना पड़ेगा?
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