नोएडा प्राधिकरण के सिविल ठेकों में बड़ी धाधंली, 4 कर्मचारियों को उठा ले गई जांच एजेंसी, जाने पूरा मसला

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के सिविल कार्यों से जुड़े ठेकों में कथित धाधंली की जांच अब आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने प्राधिकरण से जुड़े चार कर्मचारियों को पूछताछ के लिए अपने साथ लिया है। इनमें प्राधिकरण के एक जीएम के पीएस और सर्किल-10 में तैनात एक सुपरवाइजर के शामिल होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि इसके बाद इंजिनियरर्स पर हाथ डाला जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां चारों कर्मचारियों को उनके घर से दस्तावेजों के साथ पूछताछ के लिए ले गईं। फिलहाल उनसे पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक तौर पर एजेंसियों या नोएडा प्राधिकरण की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

ठेकों के साथ अवैध निर्माण से जुड़े लेनदेन की भी जांच

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा केवल सिविल ठेकों में कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। भंगेल और सलारपुर में बने कुछ अवैध निर्माणों से जुड़े कथित पैसों के लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है।

एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ठेकों में कथित गड़बड़ी से किन लोगों को फायदा पहुंचा और इस पूरे मामले में प्राधिकरण से जुड़े लोगों की क्या भूमिका रही। जांच में ठेकों से संबंधित फाइलों, दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की बात कही जा रही है।

कई दिनों से निगरानी में थे कर्मचारी

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के लिए ले जाए गए चारों कर्मचारी पिछले कई दिनों से जांच एजेंसियों की निगरानी में थे। उनके कामकाज, संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की जांच के बाद एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ लिया।

बताया जा रहा है कि कर्मचारियों से मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री का नोएडा प्राधिकरण के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित ठेकों में प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किन लोगों की बनती है।

जांच के दायरे में कौन-कौन?

फिलहाल जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चारों कर्मचारियों से किस मामले में और किन धाराओं के तहत पूछताछ की जा रही है। ऐसे में कर्मचारियों की भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना इस स्टेज पर जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस कार्रवाई से प्राधिकरण के अफसरों की नींद भी उड़ गई है।

 

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