नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी योजना तैयार की है। सेक्टर-140 और सेक्टर-147 में दो बड़े आईटी पार्क विकसित किए जाएंगे। प्राधिकरण ने दोनों सेक्टरों में आईटी पार्क के लिए जमीन चिह्नित कर ली है। इन पार्कों में देश-विदेश की बड़ी आईटी कंपनियों के साथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के मुताबिक, आईटी सेक्टर में बढ़ते निवेश और ग्लोबल कंपनियों की ओर से भारत में अपने GCC स्थापित करने की बढ़ती मांग को देखते हुए यह योजना तैयार की गई है। प्राधिकरण का उद्देश्य सिर्फ जमीन का आवंटन करना नहीं, बल्कि एकीकृत और आधुनिक आईटी हब विकसित करना है, जहां बड़ी कंपनियों को कार्यालय और कामकाज के लिए तैयार स्पेस उपलब्ध कराया जा सके।
सेक्टर-140 और 147 में चिह्नित हुई जमीन
प्राधिकरण के मुताबिक सेक्टर-140 में करीब 80 हजार वर्ग मीटर और सेक्टर-147 में करीब 67 हजार वर्ग मीटर जमीन को आईटी पार्क के लिए चिह्नित किया गया है। दोनों स्थान नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास होने के कारण कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
प्राधिकरण इन भूखंडों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग कंपनियों को आवंटित करने के बजाय एकीकृत आईटी पार्क के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे एक ही परिसर में बड़ी संख्या में आईटी कंपनियों और GCC के लिए कार्यालयीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
पहले एक आईटी पार्क से होगी शुरुआत
नोएडा प्राधिकरण इस योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाएगा। शुरुआत में एक आईटी पार्क की योजना लॉन्च की जाएगी, जिसके बाद दूसरे पार्क को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
सीईओ कृष्णा करुणेश के अनुसार, परियोजना के लिए प्राधिकरण जल्द ही योजना जारी करेगा। इसके बाद निजी विकासकर्ता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस मॉडल में प्राधिकरण जमीन का सीधा आवंटन अलग-अलग कंपनियों को करने के बजाय एक डेवलपर के माध्यम से पार्क को विकसित कराएगा।
45 साल के लिए कंपनियों को किराए पर मिलेंगे कार्यालय
प्रस्तावित मॉडल की खास बात यह है कि आईटी पार्क में तैयार होने वाले कार्यालयों को कंपनियों को 45 वर्षों की अवधि के लिए किराए पर दिया जाएगा।
यानी कंपनियों को जमीन खरीदकर अलग से अपना कार्यालय परिसर विकसित करने की जरूरत नहीं होगी। निजी विकासकर्ता पार्क का निर्माण करेगा और तैयार कार्यालय स्पेस को विभिन्न आईटी कंपनियों और अन्य पात्र संस्थानों को लंबी अवधि के लिए लीज/किराये के मॉडल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था से कंपनियों को नोएडा में अपना कामकाज शुरू करने के लिए तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सकेगा, जबकि प्राधिकरण को भी लंबे समय तक राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
50 प्रतिशत जमीन GCC के लिए होगी आरक्षित
आईटी पार्क की योजना में GCC यानी Global Capability Centres को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रस्तावित भूमि उपयोग के अनुसार करीब 50 प्रतिशत हिस्से को GCC के लिए आरक्षित किया जाएगा। GCC ऐसे केंद्र होते हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने वैश्विक स्तर के कामकाज से जुड़े तकनीकी, रिसर्च, फाइनेंस, इंजीनियरिंग, डेटा, डिजिटल और अन्य बैक-ऑफिस कार्य संचालित करती हैं। नोएडा में GCC के लिए अलग से बड़ा और एकीकृत स्पेस तैयार होने से वैश्विक कंपनियों को यहां अपना सेंटर स्थापित करने के लिए आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।
10 प्रतिशत हिस्से में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति
प्रस्तावित आईटी पार्क में करीब 10 प्रतिशत हिस्से में व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इसका उद्देश्य आईटी पार्क में काम करने वाले कर्मचारियों और कंपनियों की आवश्यकताओं के अनुरूप जरूरी व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करना है। वहीं शेष 40 प्रतिशत हिस्सा आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। यहां कंपनियां अपने कार्यालय, वर्कस्पेस और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए जगह विकसित कर सकेंगी। इस तरह आईटी पार्क में GCC, आईटी कंपनियों और आवश्यक व्यावसायिक सुविधाओं के बीच संतुलित भूमि उपयोग की योजना तैयार की गई है।
एक आईटी पार्क से 10-12 हजार रोजगार की उम्मीद
प्राधिकरण का अनुमान है कि एक आईटी पार्क के विकसित होने के बाद यहां करीब 10 से 12 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। बड़ी आईटी कंपनियों और GCC के आने से प्रत्यक्ष रोजगार के अलावा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है। आईटी पार्क के आसपास होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, सर्विस सेक्टर, सुरक्षा, सुविधा प्रबंधन और अन्य सहायक व्यवसायों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
नोएडा को GCC हब बनाने की दिशा में कदम
नोएडा में पहले से आईटी और कॉरपोरेट कंपनियों की मौजूदगी है। ऐसे में सेक्टर-140 और सेक्टर-147 में बड़े आईटी पार्क विकसित करने की योजना को शहर में आईटी सेक्टर के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। प्राधिकरण की योजना सफल होने पर इन पार्कों में देश के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय और GCC स्थापित हो सकते हैं। इससे नोएडा में निवेश बढ़ने के साथ ही शहर के आईटी और कॉरपोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विस्तार मिलने की संभावना है। प्राधिकरण के लिए यह परियोजना रोजगार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ लंबे समय तक राजस्व हासिल करने का माध्यम भी बन सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पहले आईटी पार्क की योजना कब लॉन्च होती है और निजी विकासकर्ता के चयन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।
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