लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अपने नेता विरोधी दल के चेहरे में बदलाव किया है। पार्टी ने विधान परिषद सदस्य मोहम्मद जासमीन अंसारी को नया नेता विरोधी दल नामित किया है। वह लाल बिहारी यादव का स्थान लेंगे। लाल बिहारी यादव ने 23 सितंबर को नेता विरोधी दल के पद से त्यागपत्र दिया था। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जासमीन अंसारी के नाम की संस्तुति करते हुए विधान परिषद के सभापति को पत्र भेजा।
जासमीन अंसारी इससे पहले विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के उपनेता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें नेता विरोधी दल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। नियुक्ति के बाद अंसारी ने कहा है कि वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर्मठता और ईमानदारी के साथ करेंगे।
कौन हैं मोहम्मद जासमीर अंसारी?
मोहम्मद जासमीन अंसारी मूल रूप से सीतापुर के लहरपुर क्षेत्र से आते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका राजनीतिक सफर काफी लंबे समय से जारी है। उनका जन्म 12 जनवरी 1968 को लहरपुर में हुआ था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने चाय के होटल से अपने कामकाज की शुरुआत की थी। बाद में स्थानीय राजनीति से होते हुए वह विधानसभा और विधान परिषद तक पहुंचे। जासमीर अंसारी ने 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में लहरपुर सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की और लगातार दो बार विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा
जासमीन अंसारी का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी कैसर जहां सीतापुर से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। कैसर जहां ने 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था। लहरपुर नगर पालिका की राजनीति में भी अंसारी परिवार की सक्रियता रही है।
2019 में सपा में शामिल हुए
जासमीन अंसारी ने लंबे समय तक बसपा की राजनीति की। 2007 और 2012 में वह बसपा के टिकट पर विधायक बने। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। इसके बाद वह सपा संगठन और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। सपा में आने के बाद पार्टी ने उन्हें विधान परिषद की राजनीति में आगे बढ़ाया। 2022 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए। जुलाई 2024 में उन्हें विधान परिषद में सपा का उपनेता बनाया गया था। इसके अलावा वे विधानसभा में आसवाशन समिति के सभापति का पद भी संभाल रहे है। अब पार्टी ने उन्हें नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी सौंपी है।
विधान परिषद में उपनेता से नेता विरोधी दल तक का सफर
जब 2024 में लाल बिहारी यादव को विधान परिषद में सपा का नेता विरोधी दल बनाया गया था, उस समय जासमीन अंसारी को परिषद में उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी। अब लाल बिहारी यादव के इस्तीफे के बाद पार्टी ने उसी नेतृत्व क्रम में जासमीन अंसारी को आगे बढ़ाया है। लाल बिहारी यादव का विधान परिषद का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है और रिपोर्टों के मुताबिक वह वाराणसी-मिर्जापुर खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आगामी शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा के प्रत्याशी हैं।
पूर्वांचल और पिछड़ा वर्ग की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका
अमृत विचार की रिपोर्ट के अनुसार जासमीन अंसारी पिछड़ा वर्ग के बुनकर समुदाय से आते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पार्टी की ओर से उन्हें पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों के लिए भेजा जाता रहा है। यही वजह है कि उनके नए पद को केवल विधान परिषद के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के तौर पर ही नहीं, बल्कि सपा के सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी के इस फैसले की वास्तविक राजनीतिक दिशा का आकलन आगामी महीनों में उसके संगठनात्मक फैसलों और चुनावी गतिविधियों से ही स्पष्ट होगा।
अब सदन में सरकार के सामने विपक्ष की अगुवाई की जिम्मेदारी
नेता विरोधी दल के तौर पर जासमीन अंसारी के सामने अब विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के विपक्षी पक्ष का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी होगी। उन्हें सदन में सरकार से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने, विपक्ष की भूमिका को आगे बढ़ाने और सपा के विधान परिषद सदस्यों के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
जासमीन अंसारी के राजनीतिक सफर को देखें तो यह बदलाव उनके लिए एक और बड़ा पड़ाव है। लहरपुर से दो बार विधायक, 2022 से विधान परिषद सदस्य और 2024 से उपनेता रहे जासमीन अंसारी अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के नेता विरोधी दल की भूमिका में नजर आएंगे।

