लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल का दौर जारी है। पिछले कुछ दिनों में IAS, IPS और PCS अधिकारियों के तबादलों ने प्रदेश की नौकरशाही में हलचल बढ़ा दी है। लगातार हो रहे ट्रांसफर को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ-साथ अधिकारियों की निर्धारित तैनाती अवधि और प्रशासनिक जरूरतों के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
सबसे ताजा बड़े फेरबदल में उत्तर प्रदेश सरकार ने 34 IAS अधिकारियों का तबादला किया है। इस सूची में 14 जिलों के जिलाधिकारी (DM) भी शामिल हैं। मुरादाबाद, हरदोई, एटा, कुशीनगर, कानपुर नगर, संतकबीरनगर, पीलीभीत, बलिया, अमेठी, बागपत, महोबा, बिजनौर, हाथरस और हमीरपुर में जिलाधिकारियों की तैनाती बदली गई है।
35 IPS अधिकारियों का भी बड़ा फेरबदल
IAS अधिकारियों के बाद पुलिस विभाग में भी बड़ा बदलाव किया गया है। सितंबर में उत्तर प्रदेश सरकार ने 35 IPS अधिकारियों का तबादला किया। इनमें DCP, ASP, SP और PAC कमांडेंट स्तर के अधिकारी शामिल हैं। तबादलों में गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद समेत कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस कमिश्नरेट की पोस्टिंग बदली गई है।
गौतमबुद्धनगर में तैनात DCP रवि शंकर निम का तबादला गोरखपुर किया गया, जबकि श्रवण कुमार सिंह को कानपुर से गौतमबुद्धनगर में DCP की जिम्मेदारी दी गई। इसी तरह चारू निगम को यूपी-112 लखनऊ से गाजियाबाद स्थित 47वीं वाहिनी PAC में सेनानायक बनाया गया है।
PCS अधिकारियों का भी हो चुका है बड़े स्तर पर तबादला
यह फेरबदल सिर्फ IAS और IPS तक सीमित नहीं है। सितंबर में 13 PCS अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गईं। इससे पहले जुलाई में प्रदेश में एक साथ 180 से अधिक PCS अधिकारियों के तबादले किए गए थे। कई जिलों में SDM समेत प्रशासनिक पदों पर तैनाती बदली गई।
इससे साफ है कि प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी में कई स्तरों पर अधिकारियों की तैनाती को पुनर्गठित किया जा रहा है।
तीन साल से अधिक समय से जमे अधिकारियों पर नजर
उत्तर प्रदेश की वर्ष 2026-27 की स्थानांतरण नीति में समूह ‘क’ और ‘ख’ के ऐसे अधिकारियों के तबादले का प्रावधान है, जिन्होंने संबंधित जिले में अपने सेवाकाल के दौरान तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसी तरह किसी मंडल में सात वर्ष पूरे करने वाले अधिकारियों को भी स्थानांतरित किए जाने का प्रावधान है। नीति के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों के अधिकतम 20 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकते हैं।
यही वजह है कि लंबे समय से एक ही जिले या क्षेत्र में तैनात अधिकारियों के तबादले को लेकर भी लगातार चर्चा बनी हुई है।
नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ पर भी नजर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और आसपास के जिलों में तैनात अधिकारियों की पोस्टिंग भी इस प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी अधिकारी का तबादला केवल जिले में लंबे कार्यकाल के आधार पर स्वतः तय नहीं होता और हर मामले में शासन के आदेश लागू होते हैं।
पुलिस विभाग में भी लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर बदलाव होते रहे हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन संबंधी दिशा-निर्देशों में भी लंबे समय से एक ही क्षेत्र में तैनात अधिकारियों के स्थानांतरण का प्रावधान महत्वपूर्ण होता है।
प्राधिकरणों में भी बदल रही अफसरों की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण भी इस प्रशासनिक फेरबदल से अछूते नहीं हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण समेत अन्य संस्थाओं में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती में बदलाव किए जा चुके हैं और आगे भी प्रशासनिक जरूरत के अनुसार बदलाव संभव हैं।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्राधिकरण अधिकारियों की तैनाती इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां जमीन, बिल्डर प्रोजेक्ट, किसानों के मामले, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक निवेश और शहरी विकास से जुड़े बड़े फैसले लगातार लिए जाते हैं।
चुनावी साल में क्यों बढ़ जाती है तबादलों की अहमियत?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले प्रशासनिक मशीनरी में अधिकारियों की तैनाती पर स्वाभाविक रूप से ज्यादा नजर रहती है। हालांकि मौजूदा तबादलों को केवल चुनाव के कारण किया गया है, ऐसा कहना हर मामले में सही नहीं होगा। अधिकारियों के निर्धारित कार्यकाल, प्रशासनिक आवश्यकता, विभागीय जिम्मेदारियों और शासन की स्थानांतरण नीति भी इसके महत्वपूर्ण आधार हैं।
फिर भी चुनाव नजदीक आने के साथ जिलों और पुलिस कमिश्नरेट में अधिकारियों की तैनाती का महत्व बढ़ जाता है। आने वाले महीनों में IAS, IPS के साथ PCS और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारियों की पोस्टिंग में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यानी यूपी की नौकरशाही में अभी फेरबदल का दौर थमा नहीं है। आने वाले समय में किन जिलों में नए DM, पुलिस कमिश्नरेट में कौन से नए अधिकारी और प्राधिकरणों में किन अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

