साँस के रोग से मार देगा नोएडा प्राधिकरण

नोएडा। सेक्टर-96 स्थित नए प्रशासनिक भवन में आरसीसी बेसमेंट पार्किंग की धूल और कमजोर वेंटिलेशन व्यवस्था से कर्मियों की सेहत खतरे में; बैठने-पानी की सुविधा भी नहीं

नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा प्राधिकरण) के सेक्टर-96 स्थित नए अत्याधुनिक प्रशासनिक मुख्यालय में बेसमेंट पार्किंग को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जून 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटित इस लगभग 390 करोड़ रुपये की लागत वाले भवन में डबल बेसमेंट पार्किंग आरसीसी (रेइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) से बनी है। निर्माण के दौरान सीमेंट की धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। नतीजतन आज भी दिन के समय गाड़ियों के आवागमन से उड़ने वाली सीमेंट जैसी धूल के कारण अंदर अंधेरे जैसा माहौल बना रहता है।

प्राधिकरण के सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि लगातार धूल के संपर्क में रहने से वे सांस संबंधी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। एक सुरक्षाकर्मी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “हवा साफ करने वाले यंत्र सुबह-शाम करीब एक घंटे ही चलाए जाते हैं, जैसे डॉक्टर की खुराक। पूरे दिन धूल भरी हवा में सांस लेना पड़ता है। न बैठने की व्यवस्था है, न पीने के लिए पर्याप्त पानी। परिवार का पेट पालने के लिए हमें अपनी सांस की सेहत को खतरे में डालना पड़ रहा है।” कर्मियों के अनुसार, निर्माण चरण में धूल नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया गया। आरसीसी संरचना से निकलने वाली महीन सीमेंट धूल और वाहनों के टायरों से उड़ने वाली मिट्टी मिलकर बेसमेंट को धूल भरा और कम रोशनी वाला बना देती है। एयर प्यूरीफायर सीमित समय ही चलने से समस्या जस की तस बनी हुई है।

क़ानूनी पहलू
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) के तहत नियोक्ता का दायित्व है कि कार्यस्थल पर धूल, धुएं और हानिकारक कणों से कर्मचारियों को सुरक्षित रखा जाए। संहिता के प्रावधानों के अनुसार पर्याप्त वेंटिलेशन, साफ हवा और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) भी बेसमेंट पार्किंग में यांत्रिक वेंटिलेशन सिस्टम अनिवार्य करती है, ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड और धूल का स्तर खतरनाक सीमा से नीचे रहे। यदि सुरक्षाकर्मी आउटसोर्स्ड हैं तो ठेका श्रम (नियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम तथा संबंधित नियमों के तहत भी नियोक्ता व ठेकेदार दोनों जिम्मेदार हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वस्थ कार्य वातावरण का अधिकार भी इसमें शामिल माना जाता है। धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस शिकायत पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सुरक्षाकर्मियों की मांग है कि एयर प्यूरीफायर पूरे शिफ्ट चलाए जाएं, बैठने और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था की जाए तथा धूल नियंत्रण के स्थायी उपाय किए जाएं। यह मामला प्राधिकरण के नए मुख्यालय की आधुनिक सुविधाओं के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करता है। कर्मियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।

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