नीम करौली बाबा की बायोपिक ‘हनुमान अंश’ बनी साल की सबसे बड़ी हिट

7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘हनुमान अंश’ अब तक की सबसे उल्लेखनीय आध्यात्मिक बायोपिक्स में गिनी जाने लगी है। विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित, निर्देशित और अपने बैनर स्वंभू मीडिया नेटवर्क के तहत निर्मित यह फिल्म नीम करौली बाबा — जिन्हें उनके भक्त ‘महाराज-जी’ कहते थे — के जीवन पर आधारित है। रिलीज के 41 दिनों के भीतर फिल्म ने करीब 285 करोड़ रुपए की नेट कमाई कर ली है और अब 300 करोड़ रुपए के आंकड़े की ओर बढ़ रही है, जो इसे साल की सबसे कामयाब फिल्मों में शामिल करता है।

बचपन से लेकर संत बनने तक की कहानी

यह फिल्म एक ट्रायोलॉजी की पहली कड़ी है और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की किताब “डिवाइन डिटूर: दैट चेंज्ड माय लाइफ” पर आधारित है। इसमें शोभिनव सत्या और चंदन आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि अनिल रस्तोगी, सुगंधा मल्होत्रा, भगवानदास पटेल और नेहा परांजपे सहयोगी किरदारों में नजर आते हैं। फिल्म आजादी से पहले के भारत में लक्ष्मी नारायण नाम के एक बालक की कहानी दिखाती है, जो घर छोड़कर निकलता है और आगे चलकर नीम करौली बाबा के रूप में परिवर्तित होता है। फिल्म की कहानी एक शोकाकुल बालक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी दिवंगत मां से मिलने के लिए ईश्वर की खोज में निकलता है और इस खोज में प्रेम, भोजन और मौन आशीर्वाद के चमत्कारों से मानवता की सेवा करना सीखता है।

पारंपरिक बायोपिक से अलग अंदाज़

फिल्म की खासियत यह है कि यह एक सामान्य “जन्म से मृत्यु तक” की बायोपिक नहीं है। इसके बजाय, फिल्म महाराज-जी के आंतरिक जीवन और उनके करीब आने वाले लोगों पर पड़े प्रभाव पर केंद्रित है। यही वजह है कि यह फिल्म उन दर्शकों पर भी असर डालती है, जिन्होंने पहले नीम करौली बाबा का नाम तक नहीं सुना था — और कई परिवार अपने बच्चों के साथ दोबारा फिल्म देखने पहुंचे। निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि यह फिल्म बाबा के जीवन और शिक्षाओं से “प्रेरित” है, न कि उनका दस्तावेजी विवरण। भावनात्मक बुनावट, मिले-जुले किरदार और घटनाओं का क्रम सिनेमाई है, भले ही फिल्म की आत्मा — उनकी भक्ति, हर किसी को भोजन कराने की जिद, और लोगों में बताए गए बदलाव — दशकों से भक्तों द्वारा दर्ज बातों के प्रति वफादार है।

कौन थे नीम करौली बाबा

नीम करौली बाबा का जन्म लगभग 1900 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में लक्ष्मण नारायण शर्मा के नाम से हुआ था। वे भगवान हनुमान के भक्त और एक हिंदू गुरु थे, जिन्हें उनके अनुयायी महाराज-जी कहकर पुकारते थे। उनका निधन 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ। उनकी प्रसिद्धि 1960-70 के दशक के पश्चिमी आध्यात्मिक प्रति-सांस्कृतिक आंदोलन के दौर में और बढ़ी, जब राम दास, कृष्ण दास और लैरी ब्रिलिएंट जैसे कई पश्चिमी साधक उनके शिष्य बने।

नैनीताल में हनुमानगढ़ी मंदिर की स्थापना भी नीम करौली बाबा ने ही की थी, जिसकी शुरुआत उन्होंने 1950 में की थी, जब यह जगह बच्चों के कब्रिस्तान के रूप में उपेक्षित पड़ी थी। फिल्म की सफलता के बाद बाबा से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल भी सुर्खियों में आ गए हैं। इस महीने 11 सितंबर को बाबा की 53वीं पुण्यतिथि (महासमाधि दिवस) मनाई गई, और आने वाले 25 सितंबर को वृंदावन आश्रम में वार्षिक महासमाधि भंडारा आयोजित होगा।

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