ग्रेटर नोएडा वेस्ट/नोएडा एक्सटेंशन। साइबर ठगों ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए बुजुर्ग को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। नोएडा एक्सटेंशन (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) की रहने वाली 65 वर्षीय एक महिला को साइबर जालसाजों ने करीब 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग होने का डर दिखाकर उनसे 24 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली। मामले की शिकायत मिलने पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुई ठगी की शुरुआत
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, महिला के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को दूरसंचार विभाग (टेलीफोन विभाग) का अधिकारी/कर्मचारी बताया। उसने महिला से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कुछ अवैध गतिविधियों में किया जा रहा है और उनके नाम पर मामला दर्ज होकर गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है। इसके साथ ही उनका मोबाइल नंबर बंद किए जाने की धमकी भी दी गई। अचानक आई इस चेतावनी से महिला बुरी तरह घबरा गईं। ठगों ने इसी दहशत का फायदा उठाते हुए उन्हें वीडियो कॉल पर जोड़े रखा और लगातार निगरानी में रहने का एहसास कराया — यही तरीका साइबर अपराध की भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहलाता है, जिसमें पीड़ित को घर से बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने तक की इजाजत नहीं दी जाती। करीब 48 घंटे तक महिला मानसिक दबाव में रहीं और ठगों के निर्देशों का पालन करती रहीं।
डर के साये में ट्रांसफर हुए 24 लाख रुपये
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से महिला ने जालसाजों के बताए बैंक खातों में कई किस्तों में कुल 24 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब तनाव कम हुआ और परिवार के सदस्यों से बातचीत हुई, तब जाकर महिला को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और फिर थाना साइबर क्राइम पहुंचकर औपचारिक शिकायत दी। पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उन्हें फ्रीज कराने की कोशिश भी की जा रही है, ताकि कुछ रकम वापस दिलाई जा सके।
नोएडा में थमने का नाम नहीं ले रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ
यह कोई अकेला मामला नहीं है। बीते कुछ महीनों में गौतमबुद्धनगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) साइबर क्राइम थानों में डिजिटल अरेस्ट के दर्जनों मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें बुजुर्गों को खासतौर पर निशाना बनाया गया है, कुछ समय पहले नोएडा में एक बुजुर्ग महिला को 56 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 65 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर ठगी की गई थी, जिसमें पीड़िता को अस्थमा अटैक तक आ गया था।
एक अन्य मामले में रिटायर्ड अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 30 लाख रुपये ठगे गए। नोएडा के एक बुजुर्ग दंपति से ‘फर्जी केस’ में फंसाने की धमकी देकर 58 लाख रुपये ऐंठे गए। हाल ही में एक अन्य बुजुर्ग महिला से मोबाइल नंबर और आधार के दुरुपयोग का डर दिखाकर, आतंकी फंडिंग में नाम जोड़ने की धमकी देकर करीब 44 लाख रुपये की ठगी हुई। कुछ मामलों में तो ठगी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच गई, जिनमें आरोपियों को हरियाणा और अन्य राज्यों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ठग खुद को कभी सीबीआई, ईडी, पुलिस, आरबीआई या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट, नोटिस या पत्र भेजते हैं, ताकि पीड़ित को असली सरकारी कार्रवाई जैसा भरोसा हो जाए।
पुलिस की अपील: घबराएं नहीं, तुरंत करें शिकायत
गौतमबुद्धनगर पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि, कोई भी सरकारी एजेंसी पुलिस, सीबीआई, ईडी या दूरसंचार विभाग फोन या वीडियो कॉल के जरिए न तो गिरफ्तार करती है और न ही डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया अपनाती है। किसी भी अनजान कॉल पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें, न ही ओटीपी, बैंक डिटेल्स या आधार जानकारी साझा करें। ऐसी किसी भी कॉल की स्थिति में तुरंत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को ऐसी ठगी के तरीकों के बारे में समय-समय पर जानकारी देते रहें, ताकि वे किसी भी संदिग्ध कॉल में जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। फिलहाल साइबर क्राइम थाना पुलिस मामले की तकनीकी जांच में जुटी है और आरोपियों तक पहुंचने के लिए कॉल डिटेल्स व बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर रही है।
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