नई दिल्ली/मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने से हुई मौत के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश पर नई एफआईआर दर्ज कर ली है। यह एफआईआर दिशा के पिता सतीश सालियन की शिकायत और उनके बयान के आधार पर 13 सितंबर 2026 को दर्ज की गई। इसमें सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, साक्ष्य नष्ट करने और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर अपराधों की जांच का उल्लेख है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि एफआईआर में आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, अभिनेता सूरज पंचोली, डिनो मोरिया समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है। लेकिन इन नामों को “आरोपी” के रूप में नहीं बल्कि उन व्यक्तियों के रूप में दर्ज किया गया है, जिनकी भूमिका की जांच करनी है। सीबीआई अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अभी किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर ही नामों को आरोपी की श्रेणी में जोड़ा जा सकता है।
क्या कहती है एफआईआर और किन धाराओं में दर्ज हुई?
दिशा के पिता के वकील अधिवक्ता नीलेश ओझा के अनुसार, सीबीआई ने सतीश सालियन की शिकायत और उनके बयान की प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की। इसमें मुख्य रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी (सामूहिक दुष्कर्म), धारा 302 (हत्या), धारा 201 (साक्ष्य गायब करना या झूठी जानकारी देना), धारा 217 और 218 (लोक सेवक द्वारा गलत रिकॉर्ड बनाना) तथा धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) का उल्लेख है।
एफआईआर में कहा गया है कि जिन व्यक्तियों की भूमिका की जांच आवश्यक है, उनमें शामिल हैं—शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे, उनके पिता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, रोहन रॉय, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड्स, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह, तत्कालीन डीसीपी विशाल ठाकुर, मालवणी पुलिस स्टेशन के कई अधिकारी, एसआईटी के सदस्य, पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर संजय यादव, फॉरेंसिक लैब के अधिकारी तथा इमारत के सुरक्षा गार्ड आदि। ये नाम दिशा के पिता की शिकायत और उनके बयान में आए हैं। वकील ओझा ने आरोप लगाया है कि दिशा की मौत शक्तिशाली लोगों की गहरी साजिश का परिणाम थी। उनके अनुसार दिशा पर क्रूर यौन हमला किया गया और फिर हत्या कर दी गई तथा मामले को आत्महत्या का रूप देकर सबूतों से छेड़छाड़ की गई। ये आरोप अभी जांच के विषय हैं और इनकी पुष्टि या खंडन सीबीआई की जांच पर निर्भर करेगा।
कानूनी स्थिति: नाम आना आरोपी होना नहीं है
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में साफ निर्देश दिया था कि सीबीआई जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री और सबूत मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नहीं माना जाए। अदालत ने कहा था कि मामले में कई स्पष्ट विसंगतियां हैं और मुंबई पुलिस द्वारा धारा 174 (अब संबंधित प्रावधान) के तहत की गई जांच सीमित दायरे की थी, जो संदिग्ध मौत के मामले में पर्याप्त नहीं थी। सीबीआई के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि इस स्तर पर कोई आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच के दौरान यदि किसी की संलिप्तता साबित होती है तभी उनका नाम आरोपी के रूप में जोड़ा जाएगा। कानूनी रूप से, एफआईआर में नाम का उल्लेख केवल जांच के दायरे को दर्शाता है। यह किसी की दोषसिद्धि या आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित नहीं करता। अदालत ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया जाता तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाए, जिसके खिलाफ दिशा के पिता विरोध याचिका दायर कर सकते हैं। जांच की कमान अनुभवी अधिकारी सीमा पहुजा के पास है, जो सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट में एसपी के पद पर हैं। उन्होंने हाथरस, उन्नाव और अन्य संवेदनशील मामलों की जांच संभाली है।
पृष्ठभूमि और पूर्व जांच
दिशा सालियन 28 वर्ष की थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित रेजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। मुंबई पुलिस ने इसे आकस्मिक मौत रिपोर्ट (एडीआर) के रूप में दर्ज किया और आत्महत्या माना। महाराष्ट्र की एसआईटी ने भी बाद में कोई फoul play नहीं पाया। दिशा की मौत सुशांत सिंह राजपूत की मौत (14 जून 2020) से महज छह दिन पहले हुई थी। सतीश सालियन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। अदालत ने पूर्व जांच में कई विसंगतियों—जैसे स्पॉट पंचनामा में देरी, फोन और लैपटॉप की देर से जब्ती, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट संबंधी मुद्दे आदि—का जिक्र करते हुए नई जांच का आदेश दिया।
सूरज पंचोली का बयान
अभिनेता सूरज पंचोली ने एफआईआर में अपना नाम आने के बाद सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उन्होंने कभी दिशा सालियन या आदित्य ठाकरे से मुलाकात नहीं की। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद और अनुचित बताया तथा जांच एजेंसियों से सहयोग का भरोसा जताया। रिया चक्रवर्ती और डिनो मोरिया की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे क्या होगा?
सीबीआई अब पूर्व जांच के रिकॉर्ड, फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम सामग्री, गवाहों के बयान, मालवणी पुलिस स्टेशन के अधिकारियों, पहले पहुंचने वाले कर्मियों तथा अन्य संबंधित लोगों की जांच करेगी। जांच के दौरान सबूतों के आधार पर मामले का दायरा बढ़ या संकुचित हो सकता है। यह मामला छह साल बाद फिर से सुर्खियों में है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, अभी सभी नाम जांच के दायरे में हैं और दोष या निर्दोषता का फैसला सबूतों पर ही आधारित होगा। अदालत और सीबीआई दोनों ने स्पष्ट किया है कि नाम आने मात्र से कोई व्यक्ति आरोपी नहीं बन जाता।

