नोएडा प्राधिकरण में ट्रैक्टर लेकर पहुंचे राकेश टिकैत

नोएडा, सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को भी जारी रहा। इसी दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत सैकड़ों किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर धरनास्थल पहुंचे। अधिकारियों के आग्रह पर उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों की मांगों पर करीब दो घंटे तक वार्ता की।

बैठक में किसानों की ओर से 17 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। वार्ता में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, विकसित भूखंड, आबादी और लीजबैक से जुड़े मामलों सहित किसानों की अन्य समस्याओं पर बिंदुवार चर्चा हुई।

ट्रैक्टर से प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे टिकैत

धरनास्थल से राकेश टिकैत किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर प्राधिकरण कार्यालय के अंदर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर प्राधिकरण कार्यालय के भीतर पहुंचने वाला यह पहला ट्रैक्टर है। टिकैत ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और लंबा तथा व्यापक किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता राकेश टिकैत ने की, जबकि संचालन भाकियू गौतमबुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने किया। प्राधिकरण की ओर से सीईओ कृष्णा करुणेश के अलावा एसीईओ पुष्पराज सिंह, ओएसडी क्रांति शेखर सिंह, ओएसडी हर्षिता तिवारी, महाप्रबंधक आरपी सिंह, एके अरोड़ा और नियोजन विभाग से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। किसान पक्ष से संगठन के कई पदाधिकारी और प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए।

17 सूत्रीय मांगों पर हुई चर्चा

किसानों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण के बदले विकसित भूखंडों का आवंटन, लंबित मुआवजे का भुगतान और आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण शामिल है। किसान संगठनों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों और परियोजनाओं के आधार पर 5, 6, 7 और 10 प्रतिशत भूखंडों के कोटे से जुड़े मामले लंबित हैं। कुछ किसान 10 प्रतिशत विकसित भूखंड और नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अतिरिक्त लाभ की मांग भी कर रहे हैं। किसानों ने 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे, लीजबैक से जुड़े मामलों के निस्तारण और आबादी की जमीन पर बने निर्माण को नियमित करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही भूमिहीन किसानों को भूखंड, नोएडा एयरपोर्ट और क्षेत्र की विकास परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दे भी मांगपत्र में शामिल बताए जा रहे हैं।

तीनों प्राधिकरणों से जुड़े किसानों का मुद्दा

राकेश टिकैत ने कहा कि बुधवार की वार्ता केवल नोएडा प्राधिकरण तक सीमित नहीं है। आगे लिया जाने वाला निर्णय नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण से जुड़े किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। किसानों का कहना है कि तीनों प्राधिकरण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़े कई मामले वर्षों से लंबित हैं। इससे पहले किसानों ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालयों के बाहर तंबू लगाकर डेरा डाल रखा है और मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।

वार्ता के बाद भी आंदोलन जारी

बैठक के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि अधिकारियों के साथ हुई बातचीत की समीक्षा करने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और किसानों की मांगों का ठोस समाधान जरूरी है। टिकैत ने संकेत दिया कि यदि प्राधिकरण स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल किसानों ने धरना समाप्त नहीं किया है। प्राधिकरण की ओर से मांगों पर बिंदुवार चर्चा हुई है, लेकिन तत्काल किसी अंतिम समझौते या लिखित समाधान की घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में किसानों का आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।

आगे क्या होगा?

किसान नेताओं के अनुसार, वार्ता के बिंदुओं की समीक्षा के बाद संगठन आगे की रणनीति घोषित करेगा। यदि प्राधिकरण लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समयसीमा और लिखित आश्वासन देता है तो बातचीत आगे बढ़ सकती है। वहीं, ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में महापंचायत, व्यापक धरना और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की चेतावनी दी गई है।

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