नोएडा/ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के हाई-प्रोफाइल जिले गौतमबुद्ध नगर की तीनों प्रमुख विधानसभा सीटों—नोएडा, दादरी और जेवर—की सियासी हवा इन दिनों बदली-बदली नजर आ रही है। इन सीटों पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वर्तमान विधायकों के सामने अब विपक्षी दलों से अधिक अपनी ही पार्टी के भीतर से मिल रही चुनौती बड़ी मुसीबत बन गई है।
आगामी चुनावी चक्र को देखते हुए भाजपा के कई प्रभावशाली स्थानीय नेताओं, पूर्व पदाधिकारियों और दावेदारों ने इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि वर्तमान विधायकों के लिए अब सबसे बड़ी लड़ाई ‘बाहर’ से नहीं, बल्कि संगठन के ‘अंदर’ अपनी दावेदारी बनाए रखने की बन गई है।
1. नोएडा सीट: ‘हाई-प्रोफाइल’ गढ़ में नए दावेदारों का दबाव
नोएडा विधानसभा सीट प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। यहां से वर्तमान में भाजपा के पंकज सिंह विधायक हैं। शहरी मतदाताओं की बहुलता वाली इस सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत किला माना जाता रहा है।
हालांकि, पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों और व्यापारिक मोर्चे से जुड़े चेहरों ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी है।
- भीतरी हलचल: पार्टी के भीतर एक धड़ा यह तर्क दे रहा है कि शहर की स्थानीय समस्याओं—जैसे फ्लैट खरीदारों के मुद्दे, बिल्डर-अथॉरिटी विवाद, और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी—को लेकर अब किसी नए स्थानीय चेहरे को मौका मिलना चाहिए।
- समीकरण: कई दावेदार अपने-अपने स्तर पर हाईकमान तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
2. दादरी सीट: जातीय समीकरणों और नए चेहरों की ‘घेराबंदी’
दादरी विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, जहां से भाजपा के तेजपाल सिंह नागर (मास्टर जी) विधायक हैं। दादरी में गुर्जर और राजपूत मतदाताओं का दबदबा है, और यही सामाजिक समीकरण अब अंदरूनी प्रतिस्पर्धा की मुख्य वजह बन रहा है।
- अंदरूनी दावेदारी: पार्टी के कई जिला स्तरीय नेता, जिला पंचायत सदस्य और युवाओं के बीच पैठ रखने वाले गुर्जर-ठाकुर नेता अपने-अपने आंकड़ों का हवाला देकर टिकट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं।
- असमंजस का कारण: स्थानीय दावेदारों का कहना है कि क्षेत्र में नए नेतृत्व को उभरने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान ने वर्तमान विधायक के लिए समर्थकों को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
3. जेवर सीट: इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास के बीच सियासी वर्चस्व की जंग
जेवर विधानसभा सीट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के निर्माण के बाद से देश-दुनिया के नक्शे पर चमक चुकी है। यहां से भाजपा के धीरेंद्र सिंह विधायक हैं। भूमि अधिग्रहण आंदोलन से लेकर एयरपोर्ट विकास तक में अपनी भूमिका के दम पर वे मजबूत स्थिति में रहे हैं।
- नए समीकरण: एयरपोर्ट और बुनियादी ढाँचे के विकास के बाद जेवर में जमीनों की कीमतें और क्षेत्र का राजनीतिक रुतबा दोनों बढ़ा है। इसी वजह से भाजपा के कई स्थानीय क्षत्रप और पूर्व प्रत्याशी इस सीट से अपनी दावेदारी का गणित बिठा रहे हैं।
- भीतरी गुटबाजी: किसान बाहुल्य इस क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन के प्रभाव और स्थानीय मुद्दों को भुनाने के लिए पार्टी के अंदर ही कई समानांतर शक्ति केंद्र उभरने लगे हैं, जो मौजूदा विधायक की राह में रोड़ा अटका रहे हैं।
‘अपनों’ की चुनौती से बढ़ा असमंजस: हाईकमान के लिए भी परीक्षा
गौतमबुद्ध नगर जिले में भाजपा की इस अंदरूनी खींचतान ने वर्तमान विधायकों को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
- स्थानीय स्तर पर दोहरे कार्यक्रम: एक तरफ जहां विधायक सरकार के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के ही अन्य दावेदार अपने-अपने बैनर-पोस्टर और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
- कार्यकर्ताओं में भ्रम: संगठन के निचले स्तर के कार्यकर्ता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वे किस धड़े के साथ खुलकर खड़े हों।
गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के भीतर मचा यह घमासान केवल टिकट पाने की रेस भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में वर्चस्व की जंग का रूप ले चुका है। अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व इस अंदरूनी कलह और ‘टिकटार्थियों’ की फौज को कैसे शांत करता है और वर्तमान विधायकों के पक्ष में माहौल बनाए रखता है या नए चेहरों पर दांव लगाता है।
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