नोएडा डूब क्षेत्र में बिजली-पानी को लेकर जेन जी का प्रदर्शन

नोएडा, नोएडा के हिंडन डूब क्षेत्र में बिजली और पानी की मांग को लेकर रविवार को किसानों और स्थानीय निवासियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और प्रशासन से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ और सड़क पर करीब आधे घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।

पर्थला गांव के पास जुटे लोग

प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से पर्थला गांव के आसपास धरने पर बैठे हैं। रविवार को आंदोलनकारियों ने धरना स्थल से पैदल मार्च शुरू किया। बड़ी संख्या में लोगों के सड़क पर उतरने से वाहनों की आवाजाही रुक गई और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर यातायात को नियंत्रित करने तथा प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य कराने का प्रयास किया।

एडीसीपी ने प्रदर्शनकारियों से की बातचीत

भीड़ और जाम की सूचना मिलने पर एडीसीपी मनीषा सिंह भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और सड़क से हटकर निर्धारित धरना स्थल पर लौटने की अपील की। पुलिस ने भीड़ को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त बल तैनात किया। अधिकारियों का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ यातायात को सुचारु करना प्राथमिकता है। बातचीत के बाद प्रदर्शनकारी वापस धरना स्थल पर लौट गए, लेकिन उन्होंने आंदोलन समाप्त नहीं किया।

लिखित आश्वासन पर अड़े किसान

भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि डूब क्षेत्र के निवासियों को बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि लंबे समय से समस्या उठाए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। खलीफा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक धरना जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे के आधार पर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

हजारों कनेक्शन काटे जाने के बाद बढ़ा आक्रोश

यह विवाद डूब क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्रवाई के बाद और गहरा गया है। छिजारसी, चोटपुर, बहलोलपुर और आसपास की कॉलोनियों में अवैध बिजली कनेक्शनों के खिलाफ अभियान चलाया गया। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, अभियान के दौरान पांच हजार से अधिक कनेक्शन काटे गए, जबकि जांच में करीब 13 हजार अवैध कनेक्शन पाए जाने का दावा किया गया है। विद्युत निगम के अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बिजली चोरी से हर महीने लगभग 6.50 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। कार्रवाई के दौरान कई जगह ट्रांसफॉर्मर और केबल भी जब्त किए गए। इसके बाद बड़ी संख्या में परिवारों के सामने बिजली का संकट खड़ा हो गया।

अस्थायी कनेक्शन की तैयारी, लेकिन स्थायी समाधान पर असमंजस

स्थिति बिगड़ने के बाद डूब क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को अस्थायी बिजली कनेक्शन देने की संभावना पर काम शुरू हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन और विद्युत निगम इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे करीब 40 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थायी बिजली कनेक्शन का मामला अभी भी जटिल बना हुआ है। डूब क्षेत्र में निर्माण, भूमि उपयोग और पर्यावरण से जुड़े नियमों के कारण विद्युत कनेक्शन देने को लेकर विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियां हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारी अस्थायी व्यवस्था के साथ-साथ स्थायी और वैध बिजली आपूर्ति की स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।

पानी की समस्या भी बनी गंभीर

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिजली कटने के साथ-साथ डूब क्षेत्र में पानी की उपलब्धता भी गंभीर समस्या बन गई है। बिजली न होने से मोटर और ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं, जिससे घरेलू उपयोग और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक बिजली कनेक्शन का समाधान नहीं होता, तब तक वैकल्पिक रूप से टैंकरों और अन्य माध्यमों से नियमित पानी की आपूर्ति की जाए। उनका कहना है कि बिजली और पानी का संकट बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों और कामकाजी परिवारों की दिनचर्या पर सीधा असर डाल रहा है।

आंदोलन आगे भी जारी रहने के संकेत

भारतीय किसान परिषद ने संकेत दिया है कि लिखित आश्वासन मिलने तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। रविवार के प्रदर्शन के बाद प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर अवैध कनेक्शनों और बिजली चोरी पर कार्रवाई जारी रखना, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक और सुरक्षित बिजली-पानी की सुविधा उपलब्ध कराना। फिलहाल पर्थला गांव और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात है। प्रशासन की अगली बातचीत और अस्थायी बिजली कनेक्शन को लेकर होने वाली कार्रवाई से तय होगा कि आंदोलन शांत होता है या आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है। बिजली निगम, जिला प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावों में आंकड़ों का अंतर दिखाई देता है। इसलिए कनेक्शन काटे जाने और प्रभावित परिवारों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जाना चाहिए।

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