नोएडा। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद अब नोएडा प्राधिकरण भी अवैध और नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण को लेकर सख्त नजर आ रहा है। इसी क्रम में प्राधिकरण की टीम ने गांव हाजीपुर के खसरा नंबर 412 में सरकारी जमीन पर बने एक मॉल के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से निर्माण के कई हिस्सों को क्षतिग्रस्त किया गया और इमारत के पिलरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्राधिकरण की इस कार्रवाई को इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हाजीपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आसपास के उन निर्माणों को लेकर खड़ा हो रहा है, जो कथित तौर पर बिना निर्धारित नियमों और स्वीकृत भू-उपयोग के आधार पर विकसित किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि हाजीपुर और आसपास के इलाकों में जमीन के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ और कृषि अथवा अन्य श्रेणी की जमीन पर बहुमंजिला आवासीय निर्माण खड़े कर दिए गए।
सरकारी जमीन पर मॉल, प्राधिकरण की कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल
गांव हाजीपुर के खसरा नंबर 412 में सरकारी जमीन पर बने मॉल के खिलाफ हुई कार्रवाई ने इलाके में हलचल पैदा कर दी है। कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण की टीम ने निर्माण को तोड़ने के साथ उसके कई पिलरों को भी क्षतिग्रस्त किया। इससे यह संदेश गया कि नोएडा प्राधिकरण अब केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहने के बजाय मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के मूड में है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या प्राधिकरण का बुलडोजर केवल एक-दो निर्माणों तक सीमित रहेगा या फिर उन बड़े इलाकों तक भी पहुंचेगा जहां कथित तौर पर वर्षों से नियमों को दरकिनार कर बड़ी संख्या में फ्लैट और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए जा रहे हैं।
महर्षि आश्रम की जमीन को लेकर भी उठते रहे हैं सवाल
हाजीपुर के आसपास महर्षि आश्रम से जुड़ी जमीन को लेकर भी लंबे समय से गंभीर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि आश्रम की जमीन के भू-उपयोग में बदलाव कर उसे आवासीय परियोजनाओं के रूप में विकसित किया गया। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि खाली पड़ी जमीन की कथित तौर पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराई गई और बाद में अलग-अलग छोटे बिल्डरों ने जमीन के छोटे-छोटे हिस्से खरीदकर वहां बहुमंजिला फ्लैटों का निर्माण शुरू कर दिया।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता और जमीन के प्रत्येक हिस्से की वैधानिक स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेखों, रजिस्ट्री दस्तावेजों और प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में यदि प्राधिकरण इस पूरे मामले की जांच करता है तो जमीन के मूल स्वामित्व से लेकर भू-उपयोग परिवर्तन, रजिस्ट्री, बिल्डिंग प्लान और निर्माण की अनुमति तक कई स्तरों पर जांच की जरूरत होगी।
500 गज के प्लॉट पर खड़े कर दिए बहुमंजिला फ्लैट?
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कई जगह करीब 500-500 गज के छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला फ्लैटों का निर्माण कर उन्हें अलग-अलग खरीदारों को बेच दिया गया। इस तरह धीरे-धीरे पूरा इलाका घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में तब्दील हो गया।
दावा किया जा रहा है कि आसपास के क्षेत्र में ऐसे निर्माणों की संख्या इतनी अधिक है कि यहां 20 से 25 हजार तक फ्लैट तैयार हो चुके हैं। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है तो यह केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि नोएडा के शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव का भी गंभीर विषय बन जाता है।
प्राधिकरण के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस इलाके का इंफ्रास्ट्रक्चर एक निश्चित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, वहां यदि अनधिकृत तरीके से हजारों अतिरिक्त फ्लैट बना दिए गए हैं तो उसका सीधा असर सड़क, सीवर, पानी, बिजली, पार्किंग, ड्रेनेज और यातायात व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।
शहर में विकास के लिए तैयार की गई योजनाएं आमतौर पर निर्धारित आबादी और स्वीकृत भूमि उपयोग को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। ऐसे में यदि किसी इलाके में स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक आबादी बस जाती है तो सड़कें संकरी पड़ने लगती हैं, पार्किंग की समस्या बढ़ती है, सीवर और ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव आता है और जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
यही वजह है कि हाजीपुर में हुई कार्रवाई को केवल एक मॉल के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखने के बजाय पूरे इलाके में भूमि उपयोग और अवैध निर्माण की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या अब हजारों फ्लैटों पर भी चलेगा बुलडोजर?
हाजीपुर में कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्राधिकरण अब उन बहुमंजिला निर्माणों तक भी पहुंचेगा जिन पर अवैध निर्माण के आरोप लगते रहे हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई, स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया गया या जमीन का इस्तेमाल निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत किया गया, तो संबंधित कानूनों और प्राधिकरण के नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
हालांकि केवल आरोपों के आधार पर किसी भी फ्लैट या सोसाइटी को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक परियोजना की स्थिति उसके स्वीकृत नक्शे, भूमि रिकॉर्ड, कंप्लीशन/ऑक्युपेंसी स्थिति, भू-उपयोग और अन्य वैधानिक अनुमतियों के आधार पर अलग-अलग तय होगी।
खरीदारों के सामने भी खड़ा हो सकता है बड़ा संकट
यदि आने वाले दिनों में प्राधिकरण बड़े स्तर पर जांच और कार्रवाई शुरू करता है तो इसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर इन फ्लैटों को खरीदा है। सवाल यह है कि यदि किसी बिल्डर ने नियमों के विपरीत निर्माण किया और फ्लैट बेच दिए तो कार्रवाई की स्थिति में खरीदारों की जिम्मेदारी क्या होगी और उन्हें राहत कैसे मिलेगी?
यही कारण है कि प्राधिकरण के लिए केवल बुलडोजर चलाना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण की पुष्टि होती है तो उसके पीछे जमीन के मालिक, बिल्डर, बिचौलियों, नक्शा पास कराने वाली प्रक्रिया और संबंधित विभागीय स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की भी जांच जरूरी होगी।
दिल्ली हादसे के बाद नोएडा में बढ़ी चिंता
सत्यनिकेतन में इमारत गिरने जैसी घटनाओं ने एक बार फिर देश के बड़े शहरों में अनियोजित और कमजोर निर्माण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नोएडा और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ती आबादी के बीच यह जरूरी हो गया है कि प्राधिकरण निर्माण की वैधता के साथ-साथ भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की भी जांच करे।
हाजीपुर में हुई कार्रवाई से फिलहाल इतना संकेत जरूर मिला है कि प्राधिकरण अवैध निर्माण के मामले में सख्त रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि यह कार्रवाई केवल एक मॉल तक सीमित रहती है या फिर उन इलाकों तक भी पहुंचती है जहां कथित तौर पर हजारों फ्लैट और व्यावसायिक निर्माण नियमों को लेकर सवालों के घेरे में हैं।
अगर प्राधिकरण वास्तव में व्यापक अभियान चलाता है तो आने वाले दिनों में हाजीपुर और आसपास के क्षेत्र में कई बड़े निर्माणों की वैधता जांच के दायरे में आ सकती है। ऐसे में 20 से 25 हजार कथित फ्लैटों का आंकड़ा, महर्षि आश्रम की जमीन का भू-उपयोग, कथित रजिस्ट्री और छोटे भूखंडों पर हुए बहुमंजिला निर्माण—ये सभी मुद्दे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
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