मुंबई, 10 सितंबर। भारतीय रुपया गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर चढ़ रही हैं, जिसका असर घरेलू करेंसी बाजार पर साफ दिखा। इसके अलावा डेरिवेटिव मैच्योरिटी और कॉरपोरेट हेजिंग से जुड़ी डॉलर की ऊंची मांग ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। कारोबार के अंत में रुपया 0.3% टूटकर 95.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह मध्य जुलाई के बाद रुपये की एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है।
RBI के हस्तक्षेप की रफ्तार धीमी
डीलरों के मुताबिक सरकारी बैंकों की ओर से डॉलर बिकवाली देखी गई, जो संभवतः रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से की जा रही थी। हालांकि कारोबारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह के मुकाबले इस बिकवाली की मात्रा में कमी आई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकरों के हवाले से पिछले कारोबारी सप्ताह में केंद्रीय बैंक ने रुपये को संभालने के लिए कम से कम 8 अरब डॉलर का इस्तेमाल किया था, जिससे रुपया 95 प्रति डॉलर के स्तर के ऊपर बना रहा। लेकिन इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 6% से अधिक की उछाल के सामने केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप की तीव्रता कम होती दिखी।
डॉलर-रुपया स्वैप से लिक्विडिटी घटाने की कोशिश
साथ ही, केंद्रीय बैंक बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त रुपया तरलता निकालने के लिए डॉलर-रुपया सेल/बाय स्वैप का सहारा ले रहा है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ऐसा स्वैप ऑपरेशन किया गया, जिसमें सितंबर और दिसंबर मैच्योरिटी को शामिल किया गया। इसके असर से फॉरवर्ड प्रीमियम में तेज उछाल आया। एक साल का वार्षिक इम्प्लाइड रेट दो दिन में करीब 30 बेसिस पॉइंट बढ़कर 3.37% पर पहुंच गया, जो मई के अंत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
अन्य एशियाई करेंसी और वैश्विक बाजार
ज्यादातर एशियाई करेंसी में भी गिरावट देखी गई, जबकि डॉलर इंडेक्स में मामूली मजबूती आई। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के नीतिगत फैसले से पहले यूरो में बहुत ज्यादा हलचल नहीं दिखी। बाजार को ECB से ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान अगले सप्ताह अपने नीतिगत फैसले सुनाएंगे। जापानी बैंक MUFG के एक नोट के मुताबिक, ECB की बैठक और गुरुवार को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों (CPI) पर बाजार की नजर टिकी है, क्योंकि यह डेटा फेड के इस महीने के ब्याज दर फैसले के लिए अहम माना जा रहा है। इन्हीं वजहों से फिलहाल फॉरेक्स मार्केट में बड़ी हलचल देखने को नहीं मिल रही है।

