ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य गेट पर बुधवार को एक बार फिर तनाव का माहौल देखने को मिला, जब अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों और मौके पर तैनात पुलिस बल के बीच धक्का-मुक्की हो गई। प्राधिकरण कार्यालय में प्रवेश को लेकर हुई इस झड़प के बाद कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही, हालांकि मौके पर मौजूद अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर हालात को काबू में कर लिया।
क्या है पूरा मामला
पिछले कई दिनों से किसान संगठन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। बीते सप्ताह घोड़ी-बछेड़ा गांव के प्रभावित किसानों ने चार फीसदी विकसित भूखंड की मांग को लेकर तिरंगा हाथ में लेकर प्राधिकरण कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला था और मुख्य गेट पर धरना देकर जमकर नारेबाजी की थी। उस दौरान भी सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल के साथ पीएसी तैनात करनी पड़ी थी और मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शन के दौरान एक किसान की तबीयत बिगड़ने की घटना भी सामने आई थी, जिसे पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। इसी बीच किसान संघर्ष मोर्चा ने लंबित मांगों को लेकर 9 सितंबर को प्राधिकरण पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान पहले ही कर दिया था। बुधवार को जब बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर प्राधिकरण गेट पर पहुंचे, तो गेट पर प्रवेश को लेकर पुलिस और किसान संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
प्रशासन ने की भारी सुरक्षा व्यवस्था
किसानों के आंदोलन की आशंका को देखते हुए प्राधिकरण कार्यालय के आसपास पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बावजूद इसके किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने गेट की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिस पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
किसानों का रुख अब भी सख्त
किसान नेताओं का कहना है कि प्राधिकरण लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी कर रहा है, जिसके चलते उन्हें बार-बार सड़क पर उतरना पड़ रहा है। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले भी किसान संगठन प्राधिकरण के खिलाफ कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं और बैरिकेडिंग तोड़कर परिसर में घुसने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल प्रशासन और पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसान संगठनों की ओर से आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने के संकेत दिए जा रहे हैं, वहीं प्राधिकरण की ओर से मांगों पर बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही जा रही है।
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