जेवर एयरपोर्ट से लेकर ग्रेनो प्राधिकरण तक, गौतमबुद्ध नगर में किसानों का हल्लाबोल

गौतमबुद्ध नगर। जिले में किसानों का असंतोष एक बार फिर सतह पर आ गया है। एक तरफ जेवर एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित परिवार मुआवजे और रोजगार को लेकर लामबंद हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के किसान 10 प्रतिशत भूखंड और नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। जिले में अलग-अलग किसान संगठनों की सक्रियता से आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने के आसार हैं।

दनकौर बैठक: भाकियू महासभा ने दी आंदोलन की चेतावनी

जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (महासभा) ने बीते सोमवार को दनकौर कस्बे में एक अहम बैठक की। बैठक की अध्यक्षता कोशिंदर ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी संगठन के मीडिया प्रभारी मुजाहिद एडवोकेट ने निभाई। बैठक में मुआवजे, रोजगार और अन्य लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता भाटी ने कहा कि किसान लगातार अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना था कि जेवर एयरपोर्ट और अन्य बड़ी परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि जिन किसानों की जमीन पर ये बड़े प्रोजेक्ट खड़े हो रहे हैं, उन्हें उचित मुआवजा और नौकरी मिलना उनका वाजिब हक है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के रास्ते पर उतरेगा।

गीता भाटी ने जेवर के छोटे टोल को स्थानीय निवासियों के लिए निःशुल्क किए जाने को संगठन के करीब दो साल के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया, जिसे धरना-प्रदर्शन और ज्ञापनों के जरिए हासिल किया गया। बैठक के दौरान संगठन का विस्तार भी हुआ जितेंद्र नागर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राघव सिंघल को जिला सचिव, जबकि तरुण नागर और इंद्रजीत नागर को तहसील उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान सैकड़ों किसानों और युवाओं ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर आज प्रदर्शन, किसान संघर्ष मोर्चा का हल्लाबोल

इसी बीच किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आज, 9 सितंबर को सुबह 10 बजे बड़ी संख्या में किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की मुख्य मांगें हैं 10 प्रतिशत आबादी भूखंड का आवंटन, आबादी से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण, नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 20 प्रतिशत भूखंड और 20 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर मुआवजा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा के अनुसार, किसान पिछले तीन साल से इन्हीं मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन के दबाव में मुआवजे की राशि बढ़ाई गई है, लेकिन यह अब भी मौजूदा बाजार भाव से कम है। उन्होंने नए कानून के अनुरूप 20 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर मुआवजा और 20 प्रतिशत भूखंड की मांग एक बार फिर दोहराई।

भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने आरोप लगाया कि 17 जुलाई और 17 अगस्त के आंदोलनों के बाद प्रशासन ने कई आश्वासन दिए थे, लेकिन इसके बावजूद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना — तीनों प्राधिकरणों के सीईओ के साथ किसानों की बातचीत अब तक नहीं कराई गई, जिससे किसानों में गहरा असंतोष है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब प्राधिकरण परिसर में पक्का धरना दिया जाएगा। किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने इसे चुनावी वर्ष बताते हुए कहा कि किसान अपने मुद्दों का समाधान होने तक पीछे नहीं हटेंगे। वहीं किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नगर ने बताया कि 10 प्रतिशत भूखंड और नए कानून से जुड़ी मांगों को प्राधिकरण बोर्ड बैठक में पास कर सरकार के पास भेजा जा चुका है, और अब यह आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

14 सितंबर को राकेश टिकैत की मौजूदगी में बड़ी किसान पंचायत

किसानों का आंदोलन यहीं नहीं थमेगा। 14 सितंबर 2026 को गौतमबुद्ध नगर में किसानों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना — तीनों प्राधिकरणों के खिलाफ आयोजित इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी शामिल होंगे। इसमें भूखंड आवंटन, आबादी के निस्तारण, मुआवजे, रोजगार और गांवों के विकास से जुड़ी लंबित मांगें प्रमुखता से उठाई जाएंगी। किसानों के पांच और दस प्रतिशत भूखंडों के आवंटन का मुद्दा भी इस पंचायत में केंद्र में रहेगा। संगठन के पदाधिकारियों ने पंचायत को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की अपील की है, क्योंकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की समस्याएं अलग-अलग होते हुए भी मूल रूप से जमीन, आबादी, रोजगार और ग्रामीण विकास से ही जुड़ी हैं।

जेवर एयरपोर्ट: मुआवजा वितरण में तेजी, लेकिन नाराजगी बरकरार

जेवर एयरपोर्ट परियोजना गौतमबुद्ध नगर में सबसे बड़े भूमि अधिग्रहणों में से एक है। पूरी परियोजना में करीब 5,428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण और लगभग 18 गांवों के 25 हजार किसानों का विस्थापन शामिल है, जिसमें से 4,752 हेक्टेयर पांच रनवे के निर्माण के लिए और शेष हिस्सा पुनर्वास के लिए तय है। प्रशासन ने एयरपोर्ट के दूसरे और तीसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करते हुए 14 प्रभावित गांवों में विशेष कैंप लगाकर मुआवजे संबंधी दस्तावेज तैयार कराए हैं। तीसरे चरण में करीब 8,600 करोड़ रुपए के मुआवजे का वितरण भी शुरू हो चुका है और हाई कोर्ट से अधिग्रहण को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि अदालत ने यह शर्त रखी है कि पुनर्वास स्थल पूरी तरह तैयार होने तक किसानों के मौजूदा घरों पर कब्जा नहीं लिया जाएगा। बीते जून में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट के संचालन के मौके पर 170 किसानों को विशेष विमान से लखनऊ ले जाया गया था, लेकिन हजारों प्रभावित किसान अब भी मुआवजे और रोजगार के इंतजार में हैं। इसी असमानता को लेकर किसान संगठनों में नाराजगी है, जो अब जेवर से लेकर ग्रेटर नोएडा तक एक साझा आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।

आगे क्या

9 सितंबर के प्रदर्शन और 14 सितंबर की महापंचायत के बाद यह देखना अहम होगा कि प्रशासन किसानों को उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन देता है या आंदोलन और उग्र होता है। चुनावी वर्ष में किसान संगठनों की सक्रियता और नेताओं के तेवर बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में गौतमबुद्ध नगर में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रंग ले सकता है।

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