BSP में बड़ा फेरबदल: मायावती ने ईशान आनंद को बनाया मुख्य सेक्टर प्रभारी, जानिए आकाश को क्यो हटाया

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) आंतरिक उठापटक से जूझती नजर आ रही है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से मुक्त करने के बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

कौन हैं ईशान आनंद?

ईशान आनंद, बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे और मायावती के भतीजे हैं। वे आकाश आनंद के छोटे भाई हैं और अब तक पारिवारिक कारोबार में सक्रिय थे। ईशान ने लंदन की प्रतिष्ठित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर’ से कानून (LL.B) की पढ़ाई पूरी की है।

मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाए गए, 15 राज्यों की मिली जिम्मेदारी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक मायावती ने ईशान आनंद को पार्टी में मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। इस भूमिका के तहत उन्हें करीब 15 राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों और कामकाज की समीक्षा करनी होगी। ईशान इन सभी राज्यों से जुड़े फीडबैक और ग्राउंड रिपोर्ट सीधे अपने पिता व बसपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के साथ-साथ पार्टी सुप्रीमो मायावती को भी सौंपेंगे। हालांकि पार्टी की ओर से अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, और सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में उन्हें कुछ और राज्यों का प्रभार सौंपे जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं।

आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद बदले समीकरण

गौरतलब है कि हाल ही में मायावती ने अपने भतीजे और तत्कालीन चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को पद से हटाकर उन्हें सामान्य पार्टी कार्यकर्ता की भूमिका में ला दिया था। आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करने के कुछ ही समय बाद यह फैसला लिया गया। इसके ठीक बाद बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।

वंशवाद की राजनीति पर घिरती नजर आ रहीं मायावती

बसपा हमेशा से खुद को वंशवाद की राजनीति के खिलाफ खड़ी पार्टी के तौर पर पेश करती रही है। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी बनाना, फिर उन्हें हटाना, और अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को अहम जिम्मेदारी सौंपना — यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि पार्टी की कमान परिवार के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। इससे पहले मायावती अपने भाई आनंद कुमार को भी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दे चुकी हैं।

क्या बार-बार का बदलाव बसपा के लिए फायदेमंद रहेगा?

सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी के भीतर लगातार हो रहे इस तरह के बदलाव बसपा के संगठनात्मक ढांचे के लिए सही साबित होंगे, या फिर आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व को लेकर बार-बार अनिश्चितता कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है, जो चुनाव से ठीक पहले पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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