नोएडा। नोएडा के सेक्टर-78 में रहने वाले 63 वर्षीय कारोबारी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करीब 1 करोड़ 45 लाख 45 हजार रुपये ठग लिए। आरोप है कि ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर कारोबारी को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में फंसने की बात कही। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें कई दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया।
पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई, उनकी भी जांच की जा रही है।
व्हाट्सऐप कॉल से शुरू हुआ साइबर ठगी का खेल
सेक्टर-78 निवासी मनोज अग्रवाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 27 जुलाई 2026 को उनके व्हाट्सऐप नंबर पर रंजीत कुमार नाम के व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और कारोबारी को एक आपराधिक मामले में फंसने की बात कही।
इसके बाद ठगों ने कथित तौर पर कॉल को एटीएस के अधिकारियों और एनआईए प्रमुख के नाम से जुड़े लोगों तक ट्रांसफर कर दिया। अलग-अलग अधिकारियों के नाम और पद का इस्तेमाल कर कारोबारी पर लगातार दबाव बनाया गया।
आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर
साइबर ठगों ने कारोबारी को बताया कि उनका नाम आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में सामने आया है। इसके बाद गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई।
ठगों ने कारोबारी को वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा और कथित तौर पर निर्देश दिया कि वह किसी परिजन, दोस्त या अन्य व्यक्ति से इस बारे में संपर्क न करें। इस तरह कई दिनों तक उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया।
परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी
ठगी के दौरान आरोपियों ने कारोबारी के अंदर इतना डर पैदा किया कि वह उनके निर्देशों का पालन करते रहे। शिकायत के मुताबिक, ठगों ने यह धमकी भी दी कि यदि उनके निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो उनके बच्चों, नाती और परिवार के अन्य सदस्यों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
डर और दबाव के बीच आरोपियों ने कारोबारी से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई।
15 दिन में 1.45 करोड़ रुपये कराए ट्रांसफर
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 7 अगस्त से 21 अगस्त 2026 के बीच कारोबारी से कई बार लेनदेन कराया गया। इस दौरान कुल करीब 1 करोड़ 45 लाख 45 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए।
रकम ट्रांसफर होने के बाद कारोबारी को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई और उसका शिकायत नंबर पुलिस को उपलब्ध कराया।
साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत
पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को देने के साथ साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब उन बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई।
बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के मुताबिक, जिन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, लेनदेन और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, एनआईए या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जाता है।
नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए तरीकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोगों को निशाना बनाकर ठग पहले कानूनी कार्रवाई का डर पैदा करते हैं और फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें लगातार निगरानी में रखने का दावा करते हैं।
पुलिस लगातार लोगों को सलाह देती रही है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करके बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देती। ऐसे किसी भी फोन, वीडियो कॉल या धमकी की स्थिति में तुरंत कॉल काटकर संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

