नैरोबी/नई दिल्ली। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने गुरुवार (3 सितंबर 2026) को काजियाडो काउंटी के दौरे के दौरान भारतीय कंपनी टाटा केमिकल्स को देश छोड़ने का साफ आदेश दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने लगभग 100 साल से मगाडी झील के सोडा ऐश संसाधनों का दोहन किया, लेकिन काजियाडो में कोई बड़ा निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट या पर्याप्त स्थानीय नौकरियां नहीं दीं।
राष्ट्रपति रुटो ने स्वाहिली में कहा, “टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया, कोई फैक्टरी नहीं लगाई और यहां के लोगों को नौकरी नहीं दी। मैंने उन्हें हाल ही में कहा था कि सामान पैक करके चले जाओ। वे हमारे संसाधन भारत और दूसरे देशों ले जाते हैं। क्या हम दूसरों के गुलाम हैं?” उन्होंने घोषणा की कि सरकार दो नई कंपनियां लाएगी। एक काजियाडो में बड़ी ग्लास मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करेगी और दूसरी केमिकल मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करेगी, ताकि स्थानीय वैल्यू एडिशन, रोजगार और विकास सुनिश्चित हो।
पृष्ठभूमि: जुलाई से जारी विवाद
यह आदेश जुलाई 2026 के अंत में माइनिंग कैबिनेट सेक्रेटरी हसन जोहो के निर्देश के बाद आया है। 28-29 जुलाई को टाटा केमिकल्स मगाडी लिमिटेड (टीसीएमएल) को खनन संचालन और सोडा ऐश निर्यात तुरंत निलंबित करने को कहा गया था। आरोपों में रॉयल्टी भुगतान में अनियमितता, नियामकीय अनुपालन की कमी, स्थानीय प्रोसेसिंग (वैल्यू एडिशन) की रणनीति न होना, कम्युनिटी डेवलपमेंट एग्रीमेंट का अपर्याप्त क्रियान्वयन, स्थानीय रोजगार और स्किल ट्रांसफर की कमी तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दे शामिल थे। टाटा केमिकल्स ने जवाब में कहा कि 11 अगस्त 2026 को उन्होंने सभी मांगी गई जानकारी, रिपोर्ट और दस्तावेज जमा कर दिए हैं तथा कंपनी पूरी तरह अनुपालन कर रही है। कंपनी कानूनी और नियामक चैनलों के माध्यम से रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कर्मचारियों, मगाडी समुदाय और केन्या के आर्थिक विकास को प्राथमिकता बताई है। संचालन फिलहाल बंद है और मामला अदालत में भी है।
मगाडी प्लांट का महत्व
टाटा केमिकल्स ने 2005 में ब्रूनर मॉन्ड से मगाडी सोडा बिजनेस का अधिग्रहण किया था। मूल रूप से 1911 से चल रहा यह प्लांट अफ्रीका का सबसे बड़ा प्राकृतिक सोडा ऐश उत्पादक है। इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 3.5 लाख टन के आसपास बताई जाती है। उत्पाद मुख्य रूप से ग्लास, डिटर्जेंट, केमिकल्स और पानी के उपचार में इस्तेमाल होता है। ज्यादातर निर्यात भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के अन्य हिस्सों को होता है। केन्या के आंकड़ों के अनुसार 2025 में देश ने करीब 2.55 लाख टन सोडा ऐश निर्यात किया था, जिसकी कीमत करीब 7.36 अरब केन्याई शिलिंग (लगभग 56-57 मिलियन डॉलर) थी। कंपनी के अनुसार प्लांट में सैकड़ों कर्मचारी हैं और समुदाय विकास कार्यक्रमों से हजारों लोग लाभान्वित होते हैं।
शेयर बाजार और व्यापक प्रभाव
इस घोषणा के बाद टाटा केमिकल्स के शेयरों में गिरावट देखी गई। वैश्विक सोडा ऐश बाजार पहले से ही ऊर्जा लागत, सप्लाई चेन व्यवधान और अन्य दबावों से प्रभावित है। केन्या में यह विवाद उन बढ़ते रुझानों का हिस्सा माना जा रहा है, जहां संसाधन-समृद्ध देश विदेशी कंपनियों से अधिक स्थानीय लाभ, रोजगार और वैल्यू एडिशन की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी नेताओं ने इस कदम को निवेशकों को डराने वाला और आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताया है। कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि असली मकसद इलाके में संभावित लिथियम या अन्य संसाधन हो सकते हैं। सरकार का रुख साफ है कि संसाधनों का फायदा स्थानीय लोगों और देश को मिलना चाहिए, न कि सिर्फ निर्यात के रूप में बाहर जाना चाहिए। टाटा केमिकल्स ने कहा है कि वे केन्या सरकार के अधिकार का सम्मान करते हैं और बकाया मुद्दों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगे की स्थिति कानूनी प्रक्रिया और नए निवेशकों की घोषणा पर निर्भर करेगी। काजियाडो के प्राकृतिक संसाधनों को स्थानीय उद्योग में बदलने का राष्ट्रपति रुटो का प्लान अब परीक्षा की घड़ी में है।

