दिल्ली स्लीपर बस गैंगरेप केस: फोरेंसिक में मिले छात्रा और आरोपियों के फिंगरप्रिंट, DNA रिपोर्ट का इंतजार; 47 किमी तक चली हैवानियत

दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 4 अगस्त 2026 की रात घटित एक दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की 16 वर्षीय 11वीं कक्षा की छात्रा के साथ ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय करती खाली स्लीपर बस के अंदर कथित तौर पर गैंगरेप की वारदात हुई। मामले में दिल्ली पुलिस ने बस ड्राइवर कुलदीप (39) और कंडक्टर संदीप (26) को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी कानपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

घटना का क्रम
पुलिस के अनुसार, छात्रा परिवार में विवाद के बाद बिना बताए नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने रिश्तेदार के घर जा रही थी। मैनपुरी से निकलने के बाद भारी बारिश और अंधेरे में वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर गलत बस से उतर गई। वहां नोएडा जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी तभी एक खाली स्लीपर बस (रजिस्ट्रेशन नंबर UP-83, फिरोजाबाद में पंजीकृत) वहां से गुजरी। छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 छोड़ने का भरोसा दिलाकर बस में बैठा लिया।

बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकत शुरू की। विरोध करने पर दोनों आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और बारी-बारी से दुष्कर्म किया। बस के शीशों पर मोटे पर्दे लगे होने के कारण बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं। करीब 47 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद आरोपियों ने छात्रा को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर उतार दिया। छात्रा ने उसी रात कश्मीरी गेट थाने में शिकायत दर्ज कराई।

त्वरित गिरफ्तारी और जांच
 शिकायत मिलते ही पुलिस ने रास्ते में लगे करीब 45 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी निगरानी की मदद से बस को तिमारपुर की बस पार्किंग में ट्रैक किया। घटना वाले दिन ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और स्लीपर बस जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दी गई। पुलिस के अनुसार, उस दिन बस में खराबी आने के बाद आरोपी उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में मरम्मत के लिए ले गए थे। मरम्मत के बाद खाली बस को तिमारपुर ले जाते समय यह घटना हुई।

फोरेंसिक सबूत मिले
 2 सितंबर 2026 को पुलिस सूत्रों ने बताया कि फोरेंसिक जांच में अहम सबूत सामने आए हैं। बस से पीड़िता और दोनों आरोपियों के फिंगरप्रिंट मिले हैं। सीटों और स्टीयरिंग व्हील से भी फोरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के कपड़े जब्त किए गए हैं। पीड़िता के कपड़ों पर खून और वीर्य के दाग पाए गए हैं, जिन्हें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है। बस के अंदर छात्रा के बाल भी मिले हैं। पुलिस अब DNA रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है।

बस में कई खामियां
जांच में पता चला कि इस स्लीपर बस पर कई ट्रैफिक चालान लंबित थे। जुलाई में ही कई चालान काटे गए थे, जिनमें बिना परमिट चलाने और स्पीडिंग शामिल हैं। कुल चालान की राशि 50,000 रुपये से अधिक बताई जा रही है। बस के शीशों पर मोटे पर्दे लगे होना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। इसके अलावा, ड्राइवर और कंडक्टर की पुलिस वेरिफिकेशन के बिना नियुक्ति किए जाने की बात भी सामने आई है।

NHRC का संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नरों के साथ मैनपुरी के एसपी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह घटना 2012 के निर्भया कांड की याद दिलाती है, जिसमें भी चलती बस में युवती के साथ दरिंदगी हुई थी। पुलिस ने कहा है कि सभी सबूतों को जुटाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जांच अभी जारी है।
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