Yamuna Expressway: ₹1 में हेलीकॉप्टर एंबुलेंस! हेलमेट मैन के ‘संजीवनी बूटी मिशन’ से ऐसे बचेगी सड़क हादसों में जान

Yamuna Expressway: ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए एक अनोखी और व्यावहारिक योजना पर काम शुरू हो गया है। ‘हेलमेट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर राघवेंद्र कुमार के नेतृत्व में ‘संजीवनी बूटी मिशन’ के तहत घायलों को गोल्डन आवर में हेलीकॉप्टर से ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल पहुंचाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस सुविधा का खर्च मात्र एक रुपये में रखने का सुझाव है, जिसके लिए टोल प्लाजा पर प्रति वाहन एक रुपये का सरचार्ज लगाने की योजना है।

राघवेंद्र कुमार और उनके दल ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के ओएसडी शैलेंद्र सिंह से मुलाकात कर पायलट प्रोजेक्ट में सहयोग मांगा। ओएसडी ने प्रस्ताव को उच्च अधिकारियों के सामने रखने और सहयोग का भरोसा दिया। योजना के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे पर 32 एम्बुलेंस, हेलीकॉप्टर, हेलीपैड, क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम और मजबूत मेडिकल नेटवर्क विकसित किया जाएगा।

क्यों जरूरी है यह मिशन?
 यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर को आगरा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण और तेज रफ्तार मार्ग है, जहां अक्सर गंभीर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हादसे के बाद घायल को निकालने और अस्पताल पहुंचाने में एक से डेढ़ घंटे लग जाते हैं, जबकि मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार पहले एक घंटे (गोल्डन आवर) में उचित इलाज मिलने से जान बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। समय पर इलाज न मिलने से लगभग 50 प्रतिशत गंभीर घायलों की मौत हो जाती है। राघवेंद्र कुमार कहते हैं कि सड़क दुर्घटनाएं अदृश्य युद्ध जैसी हैं, जिनसे हर साल लाखों जिंदगियां और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है।

ट्रिपल एच मॉडल और फंडिंग का फॉर्मूला
मिशन का आधार ‘ट्रिपल एच’ मॉडल है—हेलीकॉप्टर, हाईवे और हॉस्पिटल। एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े अस्पतालों की छतों पर हेलीपैड बनाए जाएंगे। हादसा होते ही हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचेगा और घायल को आधे घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाया जाएगा। शुरुआत में 50-50 किलोमीटर के दायरे में तीन हेलीकॉप्टर तैनात करने का प्रस्ताव है।

एक हेलीकॉप्टर का सालाना लीज खर्च (फ्यूल और स्टाफ सहित) करीब सात करोड़ रुपये है। तीन हेलीकॉप्टर के लिए लगभग 21 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यमुना एक्सप्रेसवे पर रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं। यदि हर वाहन से टोल पर सिर्फ एक रुपये का सर्विस चार्ज लिया जाए तो महीने में करीब तीन करोड़ और साल में लगभग 36 करोड़ रुपये जुट सकते हैं, जो खर्च से कहीं अधिक हैं। यात्रियों पर कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

राघवेंद्र कुमार ने एयर इंडिया के अधिकारियों को गुरुग्राम में प्रस्तुति दी है। कई हेलीकॉप्टर कंपनियां, पूर्व सैन्य और बीएसएफ पायलट तथा अस्पताल सहयोग के लिए तैयार हैं। भारतीय सेना भी सहयोग कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट 2027 में यमुना एक्सप्रेसवे से शुरू करने का लक्ष्य है। सफल होने पर इसे देश के अन्य बड़े एक्सप्रेसवे पर भी लागू करने का सपना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिशन साझा करने की तैयारी चल रही है। यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि सरकारी एजेंसियां, एविएशन सेक्टर और अस्पताल मिलकर काम करें तो यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाली कई मौतों को रोका जा सकता है।
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