Greater Noida sleeper bus rape case: स्लीपर बस में महिला से दरिंदगी पर NHRC का बड़ा कदम, दिल्ली-नोएडा कमिश्नर और मैनपुरी SP को थमाया नोटिस

Greater Noida sleeper bus rape case: नई दिल्ली / नोएडा। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर चलती निजी स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) पुलिस आयुक्त और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से जांच की मौजूदा स्थिति, अब तक की गई कार्रवाई, मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य, किन लोगों के बयान लिए गए हैं, जांच किस स्तर तक पहुंची है तथा पीड़िता को कोई आर्थिक सहायता या मुआवजा मिला है या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी है। NHRC की इस कार्रवाई से घटना के पूरे घटनाक्रम, पीड़िता को मिले संरक्षण और सहायता पर निगरानी बढ़ गई है।

घटना का ब्योरा

यह घटना 4 अगस्त 2026 की रात की है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की 16-17 वर्षीय नाबालिग छात्रा (11वीं कक्षा की छात्रा) मां से नाराज होकर घर से निकली और नोएडा सेक्टर-63 में अपने रिश्तेदार के घर जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे में वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई। वहां अकेली खड़ी लड़की को मदद का झांसा देकर खाली स्लीपर बस (रजिस्ट्रेशन नंबर UP 83 ET 3789) के चालक कुलदीप (लगभग 39 वर्ष) और परिचालक संदीप (लगभग 26-29 वर्ष) ने बस में बैठा लिया। दोनों ने दावा किया कि बस सेक्टर-63 जा रही है। पुलिस के अनुसार, बस चलने के कुछ देर बाद परिचालक ने अश्लील हरकतें शुरू कीं। इसके बाद चालक और परिचालक ने चलती बस में लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। करीब 47 किलोमीटर तक बस बिना रुके चली और पीड़िता को दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में रिंग रोड के पास उतार दिया। लड़की ऑटो लेकर थाने पहुंची और घटना की सूचना दी। दिल्ली पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर तिमारपुर पार्किंग से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बस जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दी गई। आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और धमकी की धाराओं में मामला दर्ज है। दोनों कानपुर के रहने वाले बताए जाते हैं।

बस के चालान और सुरक्षा खामियां

जांच में सामने आया कि इस बस पर कई चालान लंबित थे। कुछ रिपोर्टों के अनुसार 23 दिनों में 9 चालान (कुल करीब 56 हजार रुपये) और कुल मिलाकर 12 चालान (लगभग 63 हजार रुपये) बकाया थे, जिनमें ओवरस्पीडिंग, परमिट उल्लंघन और सुरक्षा उपकरणों संबंधी उल्लंघन शामिल थे। बस में पर्दे लगे होने और स्लीपर कोच के पार्टिशन संबंधी दिशानिर्देशों के उल्लंघन का भी जिक्र NHRC ने पहले भी किया है। घटना के खुलासे में देरी और क्षेत्राधिकार को लेकर दिल्ली व नोएडा पुलिस के बीच सवाल भी उठे। नोएडा पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी।

NHRC की कार्रवाई और आगे की निगरानी

1 सितंबर 2026 को मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट सही है तो यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है। दो सप्ताह की समयसीमा में रिपोर्ट न मिलने पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। दिल्ली महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह घटना 2012 के निर्भया कांड की याद दिला रही है और दिल्ली-NCR में सार्वजनिक परिवहन, खासकर स्लीपर बसों की सुरक्षा तथा महिलाओं-लड़कियों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर रही है। पुलिस जांच जारी है। पीड़िता की पहचान कानून के अनुसार गुप्त रखी गई है।

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