Raksha Bandhan: आज 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं

Raksha Bandhan: नई दिल्ली। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आज 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को पूरे देश में मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व इस साल खास इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन साल का आखिरी आंशिक चंद्रग्रहण लग रहा है। हालांकि यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल और अन्य कोई धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। बहनें बिना किसी चिंता के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

शुभ मुहूर्त और तिथि
 श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू हुई और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो रही है। भद्रा काल 27 अगस्त को समाप्त हो चुका है, इसलिए आज सूर्योदय के बाद से पूर्णिमा समाप्त होने तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे शुभ माना जा रहा है।

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है (अवधि लगभग 3 घंटे 51 मिनट)। अन्य प्रमुख शहरों के मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • मुंबई: 6:23 से 9:48 बजे
  • कोलकाता: 5:18 से 9:48 बजे
  • बेंगलुरु: 6:08 से 9:48 बजे
  • हैदराबाद: 6:01 से 9:48 बजे
  • चेन्नई: 5:58 से 9:48 बजे
  • पुणे: 6:19 से 9:48 बजे
  • गुरुग्राम/नोएडा: लगभग 5:56-5:58 से 9:48 बजे

शहर के अनुसार सूर्योदय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है। यदि सुबह का मुहूर्त छूट जाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त या अपराह्न काल (लगभग 12:15-2:00 बजे के आसपास) में भी राखी बांधी जा सकती है। राहुकाल (दिल्ली में लगभग 10:30/10:46 से 12:00/12:22 बजे) से बचें।

चंद्रग्रहण और सूतक
28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण लग रहा है। भारतीय समय के अनुसार पेनुंब्रल चरण सुबह करीब 6:55 बजे, आंशिक चरण 8:04 बजे शुरू होकर अधिकतम 9:43 बजे के आसपास और समाप्ति दोपहर 11:21 से 12:30 बजे तक होगी। चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया में होगा। लेकिन भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए ग्रहण दिखाई नहीं देगा। पंचांग के अनुसार भारत में सूतक काल लागू नहीं है। पूजा, भोजन और राखी बांधने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

राखी बांधने की विधि और नियम

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा थाली में राखी, रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, धूप, मिठाई और फूल रखें।
  • भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। बहन पश्चिम दिशा की ओर रहें।
  • भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, आरती करें।
  • दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। टूटी या खंडित राखी न बांधें। प्राकृतिक धागे वाली राखी बेहतर मानी जाती है।
  • मिठाई खिलाएं और भाई से सुरक्षा का वचन लें। भाई बहन को उपहार दें।
  • राखी कम से कम कुछ दिनों (कई परंपराओं में जन्माष्टमी तक) कलाई पर रखें।

राखी बांधते समय मंत्र
 येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
 तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

अर्थ: जिस रक्षा सूत्र से महाबली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम कभी डगमगाओ मत, स्थिर रहो।

यह मंत्र भाई की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना के साथ पढ़ा जाता है। रक्षाबंधन सिर्फ रस्म नहीं, भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। आज शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक राखी बांधकर इस पवित्र रिश्ते को और मजबूत बनाएं। सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।

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