नोएडा। बिल्डर परियोजनाओं के बकाये को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के आधार पर लागू की गई जीरो पीरियड पॉलिसी का लाभ लेने के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करने वाले 49 बिल्डरों को प्राधिकरण ने दोबारा नोटिस जारी किया है। ग्रुप हाउसिंग विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस में बिल्डरों को बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
57 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में लागू हुई थी जीरो पीरियड पॉलिसी
अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी से दिसंबर 2023 में जीरो पीरियड पॉलिसी को प्रभावी किया गया था। इसका उद्देश्य कोविड अवधि और अन्य निर्धारित कारणों से प्रभावित बिल्डर परियोजनाओं को राहत देना और रुकी हुई परियोजनाओं में निर्माण तथा फ्लैटों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।
उस समय नोएडा प्राधिकरण की 57 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर करीब 7,800 करोड़ रुपये का बकाया था। जीरो पीरियड की अवधि को गणना से बाहर करने के बाद बिल्डरों के बकाये में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई।
36 बिल्डर पॉलिसी में हुए शामिल, 21 ने नहीं लिया लाभ
प्राधिकरण के अनुसार 57 परियोजनाओं में से 36 बिल्डर जीरो पीरियड पॉलिसी में शामिल हुए, जबकि 21 बिल्डरों ने इसका लाभ नहीं लिया। पॉलिसी का लाभ लेने वाले बिल्डरों को राहत मिलने के बाद बकाया राशि का भुगतान निर्धारित व्यवस्था के तहत करना था।
इन बिल्डरों को कुल बकाये की 25 प्रतिशत राशि जमा करने के बाद शेष रकम किस्तों में जमा करनी थी, लेकिन कई बिल्डरों ने शुरुआती भुगतान के बाद आगे की किस्तें जमा नहीं कीं। इसी वजह से प्राधिकरण ने अब दोबारा नोटिस जारी कर भुगतान के लिए दबाव बढ़ाया है।
पांच बिल्डरों का बकाया हुआ था शून्य
जीरो पीरियड का लाभ मिलने के बाद पांच ऐसे बकायेदार बिल्डर भी थे, जिनकी पूरी देनदारी समाप्त होकर बकाया राशि शून्य हो गई थी। इसके अलावा सात ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बकाया राशि पांच करोड़ रुपये से कम रह गई थी। इनमें से चार बिल्डरों ने अपनी शेष बकाया राशि भी जमा कर दी।
इन मामलों को मिलाकर कुल 36 बिल्डर जीरो पीरियड पॉलिसी के दायरे में आए थे।
एनजीटी क्षेत्र के कारण भी मिली अतिरिक्त राहत
जीरो पीरियड के अलावा एनजीटी के प्रभाव क्षेत्र में आने वाली 13 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के बकायेदार बिल्डरों को भी राहत मिली। इन परियोजनाओं में करीब 181.93 करोड़ रुपये की राशि दो साल की अतिरिक्त जीरो पीरियड राहत के कारण बकाये से कम हुई।
प्राधिकरण की ओर से बिल्डरों को दी गई इन राहतों का उद्देश्य परियोजनाओं को आर्थिक दबाव से बाहर निकालना और फ्लैट खरीदारों के हित में निर्माण एवं रजिस्ट्री की प्रक्रिया को गति देना था।
21 हजार फ्लैटों में अब तक 4,529 रजिस्ट्री
जीरो पीरियड पॉलिसी लागू होने के बाद फ्लैट खरीदारों को भी इसका लाभ मिलना शुरू हुआ है। अब तक करीब 21 हजार फ्लैटों के सापेक्ष 4,529 फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। वहीं बिल्डरों से बकाये के रूप में करीब 782 करोड़ रुपये और अतिरिक्त धनराशि प्राधिकरण के खाते में जमा हुई है।
हालांकि बड़ी संख्या में रजिस्ट्री और बकाया भुगतान का काम अभी बाकी है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने डिफॉल्टर बिल्डरों पर दोबारा शिकंजा कसना शुरू किया है।
बकाया नहीं जमा किया तो होगी कार्रवाई
नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि बकायेदार बिल्डरों को एक बार फिर नोटिस जारी कर बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण की इस कार्रवाई से उन बिल्डरों पर दबाव बढ़ने की संभावना है, जिन्होंने जीरो पीरियड पॉलिसी के तहत करोड़ों रुपये की राहत तो हासिल कर ली, लेकिन इसके बाद निर्धारित किस्तों का भुगतान नहीं किया। माना जा रहा है कि बकाया वसूली बढ़ने से ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में रुकी हुई रजिस्ट्री और निर्माण कार्य को भी गति मिल सकती है।

