Iran US Sanctions: दुबई/वाशिंगटन, ईरान ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका की किसी भी नई धमकी का जवाब “विनाशकारी” होगा। यह बयान वाशिंगटन की उस घोषणा के बाद आया, जिसमें अमेरिका ने ईरान पर इतिहास के सबसे सख्त वित्तीय प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरानी नेतृत्व को कमजोर करना और सत्ता परिवर्तन की दिशा में दबाव बनाना बताया जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि सोमवार को इन प्रतिबंधों का पूरा ब्यौरा सामने आएगा। उन्होंने इसे “वन-टू पंच” बताया—जुलाई में दोबारा लागू की गई नौसैनिक नाकाबंदी और अब इतिहास के सबसे सख्त प्रतिबंध। बेसेंट का कहना है कि इससे बड़े सैन्य अभियान की जरूरत कम हो सकती है। उन्होंने कहा, “हम इस शासन को गिराएंगे। अब हमारे सहयोगियों और दुनिया के बाकी देशों को फैसला करना होगा।” इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि कोई भी देश, वित्तीय संस्थान, व्यवसाय या सरकार जो ईरान को किसी भी तरह की “लाइफलाइन” देगा, उसे भारी आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप ने इसे “अभूतपूर्व पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलगाव” बताया।
ईरान का कड़ा रुख
ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दोल्लाह ने कहा कि ईरान की प्रतिक्रिया व्यापक और निर्णायक होगी। ईरानी मीडिया के हवाले से उन्होंने कहा, “जमीन, समुद्र, हवा, वायु रक्षा और साइबर स्पेस में तैयारियों के साथ ईरानी सशस्त्र बल दुश्मन की नई धमकियों का कुचलने वाला, सजा देने वाला और विनाशकारी जवाब देंगे।”
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ, जो अमेरिका के साथ मध्यस्थता वाली वार्ताओं में ईरान के मुख्य वार्ताकार हैं, ने पड़ोसी इराक में कहा कि वाशिंगटन को लगता है कि वह प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल अब आर्थिक और “कॉग्निटिव” युद्ध का सहारा ले रहे हैं। कालिबाफ ने कहा, “हमें अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों से निपटने की योजना बनानी होगी ताकि हम उन्हें पार कर सकें।” उन्होंने बगदाद और तेहरान के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों को “आर्थिक आतंकवाद” और “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया। मंत्रालय का कहना है कि ये उपाय ईरान की आजादी, गरिमा और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने के इरादे को जरा भी नहीं डिगाएंगे। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ट्रंप की टिप्पणियों को अमेरिका की घरेलू आर्थिक समस्याओं (ऋण और बढ़ती ब्याज दरें) से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शुक्रवार को कहा कि अब युद्ध समाप्त करने का सही समय है, जब ईरान मजबूत स्थिति में है और दुनिया अमेरिका के स्कूलों, अस्पतालों व बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा कर रही है।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
लगभग छह महीने से जारी इस संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से पहले प्रतिदिन 130 से अधिक जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर एकल अंकों में आ गई है। इससे वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ा है। चीन ईरान के निर्यात तेल का 80 प्रतिशत से अधिक खरीदता है, लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी के कारण चीनी खरीदारों को ईरानी कच्चे तेल के ऑफर कम हो गए हैं। चीन ने कहा है कि प्रतिबंध समस्या का समाधान नहीं हैं और कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए।
ईरान पिछले लगभग 50 वर्षों से सख्त प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। देश में उच्च मुद्रास्फीति, कमजोर मुद्रा, ऊर्जा की कमी और युद्ध से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा आम लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। अप्रैल और जून में दो बार संघर्ष विराम के समझौते हुए, लेकिन दोनों जल्दी टूट गए। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि अधिकतम आर्थिक दबाव से बड़े सैन्य अभियान की जरूरत घटेगी। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सहयोगियों और चीन जैसे देशों पर दबाव से जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। सोमवार को बेसेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिबंधों का विस्तृत खाका सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

