Trump’s warning: वॉशिंगटन/दुबई, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान को किसी भी प्रकार की “लाइफलाइन” उपलब्ध कराएगा, उसे भारी आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर शुरू किए गए युद्ध को लगभग छह महीने हो चुके हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कोई भी देश जो अपने वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से ईरान को किसी भी तरह की मदद देता है, उसे स्वयं भारी आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने “अभूतपूर्व पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलगाव” का वादा किया, लेकिन कोई ठोस कदम या किसी देश का नाम नहीं लिया।
युद्ध में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दबाव बढ़ाया था, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुए। इस जलमार्ग से पहले विश्व का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था। अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल और जून में दो बार युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन दोनों समझौते जल्दी ही टूट गए। मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय लेन-देन निलंबित कर दिए। यह फैसला उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें यूएई रक्षा मंत्रालय ने ईरान से दागे गए दो मिसाइलों का जिक्र किया था। ईरान ने इस रिपोर्ट को आधारहीन बताया।
आंकड़ों के अनुसार चीन ईरान से भेजे जाने वाले तेल का 80 प्रतिशत से अधिक खरीदता है। अमेरिका के लिए चीन के खिलाफ और आर्थिक दबाव बढ़ाना जोखिम भरा हो सकता है। ईरान की ओर से सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबेर ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत को आत्मसमर्पण नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि सैन्य दबाव और प्रतिबंध ईरान की दृढ़ता नहीं तोड़ सकते।ट्रंप इससे पहले मंगलवार को कह चुके थे कि ईरान से कोई वार्ता नहीं चल रही। वहीं उनके दामाद और विशेष दूत जारेड कुशनर ने एक दिन पहले कहा था कि वार्ता पहले से अधिक मजबूत चल रही है। ट्रंप ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना चाहते हैं और परमाणु कार्यक्रम को और सख्त नियंत्रण में लाने वाला नया समझौता चाहते हैं। ईरान लंबे समय से कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है।

