ग्रेटर नोएडा। दादरी विधानसभा को लेकर चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। ऐसे में भाजपा विधायक तेजपाल नागर को किसी दूसरी पार्टी के नेता से नही बल्कि अपने ही पार्टी के नेताओं से चुनौती मिल रही है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अभी समय बाकी है, लेकिन दादरी विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी और दावेदारी की होड़ अभी से दिखाई देने लगी है। दादरी से वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक तेजपाल नागर लगातार दो बार चुनाव जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि, हाल ही में सोशल मीडिया एवं होडिंग्स के जरिये संदेश देने की कोशिश है कि मौजूदा विधायक का टिकट खतरे में है। इससे क्षेत्र के सियासी गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
दादरी क्षेत्र में महिला नेत्री एवं एक स्कूल की सीएमडी कुशल सिंह का भाजपा के बैनर और चुनाव चिह्न के साथ प्रचार पोस्टर चर्चा में है, जिसमें लिखा है, मैं दादरी विधानसभा के प्रत्येक परिवार की सेवा के लिए सदैव समर्पित रहूँगी। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े स्तर पर चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियानों के पीछे 2027 के विधानसभा चुनावों में टिकट की दावेदारी पेश करने की मंशा हो सकती है।
हालांकि आमजन में धारणा बन रही है कि अपने स्कूलों में फीस कम करने से ज्यादा सेवा नहीं हो सकती… गरीब तो आपके स्कूलों में पढ़ नहीं सकते। कम से कम मिडिल क्लास फैमिली को तो राहत मिलेगी। यह सच्ची सेवा होगी। सच्ची सेवा वही होगी कि गरीबों को आपके स्कूल में पढने की जगह मिलें। उनके होडिग्स के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच शिक्षा, महंगे निजी स्कूलों की फीस और जनप्रतिनिधियों के जनहित से जुड़े दावों पर बहस छिड़ गई है।
क्या है जनता का रुख?
समाजसेवियों का कहना है कि जो भी नेता समाजसेवा और क्षेत्र के विकास का दावा करता है, उसे सबसे पहले अपने निजी या व्यावसायिक संस्थानों में आम जनता को राहत देनी चाहिए। यदि कोई शिक्षा या सेवा के नाम पर राजनीति में उतरता है, तो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए सस्ती और सुलभ शिक्षा की व्यवस्था करना उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए। 2027 की दावेदारी और भाजपा की रणनीति दादरी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक तेजपाल नागर का अपना जनाधार है, लेकिन टिकट की उम्मीद में अन्य नेताओं की बढ़ती सक्रियता से पार्टी के भीतर नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में पार्टी संगठन और क्षेत्र की जनता इन दावों और उठ रहे सवालों को किस नजरिए से देखती है।

