Gen-Z Controversy: श्रीनगर/लेह। लद्दाख के कारगिल ज़िले में द्रास के पास स्थित मिनीमार्ग चेकपोस्ट पर पर्यटकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में यातायात प्रतिबंधों को लेकर घंटों तक रोके गए पर्यटक भड़के हुए नज़र आते हैं, और मामला इतना बढ़ गया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट्स के अनुसार यह वीडियो असल में जुलाई महीने में शूट किया गया था, लेकिन बुधवार को यह दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक महिला पर्यटक सुरक्षाकर्मियों से उलझती दिखाई देती है और आरोप लगाती है कि उन्हें बेवजह घंटों रोका जा रहा है। पुलिस सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह रोक किसी वरिष्ठ अधिकारी की काफ़िले की आवाजाही की वजह से लगाई गई थी, न कि किसी अन्य कारण से। सेना ने भी स्पष्ट किया कि इस घटना से उसका कोई संबंध नहीं है, क्योंकि चेकपोस्ट पुलिस द्वारा संचालित था। वीडियो में महिला ऊँची आवाज़ में कहती सुनाई देती है कि वे “जेन-जी” हैं और यह “बकवास” बर्दाश्त नहीं करेंगी। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब कई अन्य पर्यटक भी उसके समर्थन में उतर आए और सड़क पर बैठ गए। भीड़ में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि टैक्स देने के बावजूद उनके साथ यह व्यवहार किया जा रहा है, वहीं कुछ ने यह भी कहा कि बीमार यात्रियों और नवजात बच्चों वाले परिवारों तक को घंटों इंतज़ार करना पड़ा। मौके पर मौजूद एक गेट को बंद किए जाने पर भी पर्यटकों ने कड़ी आपत्ति जताई और सवाल उठाया कि आख़िर जवाबदेही किसकी है। स्थिति तब और बिगड़ी जब कुछ पर्यटकों ने घोषणा की कि जब तक सभी को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक कोई भी वाहन आगे नहीं बढ़ेगा। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने पर्यटकों से संयम बरतने और उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की, लेकिन गतिरोध घंटों तक बना रहा।
उमर अब्दुल्ला की तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इस पर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि ‘वी आर जेन-जी’ अब वैसा ही बन गया है जैसा पहले ‘जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है’ हुआ करता था, और चेताया कि हल्की सी नाराज़गी पर इसे धमकी की तरह इस्तेमाल करना जेन-जी के प्रति बनी सद्भावना को तेज़ी से खत्म कर सकता है। अब्दुल्ला का यह बयान तुरंत सुर्खियों में आ गया और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई कि क्या किसी पीढ़ी की पहचान को व्यक्तिगत विशेषाधिकार जताने के लिए इस्तेमाल करना उचित है।
सोशल मीडिया पर बंटी प्रतिक्रियाएं
घटना का वीडियो सामने आने के बाद यूज़र्स की राय दो हिस्सों में बंटी नज़र आई। एक तबका पर्यटकों की परेशानी को जायज़ ठहराते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, तो वहीं बड़ा तबका महिला के रवैये और भाषा की आलोचना करते हुए इसे “एंटाइटलमेंट” यानी अनुचित विशेषाधिकार-बोध का उदाहरण बता रहा है। कई यूज़र्स ने यह भी लिखा कि पूरी जेन-जी पीढ़ी को एक व्यक्ति के व्यवहार के आधार पर बदनाम करना गलत है।
प्रशासन का पक्ष
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लद्दाख क्षेत्र के मार्गों पर मौसम, सड़क की स्थिति और सैन्य आवाजाही की वजह से यातायात प्रतिबंध लगना असामान्य नहीं है। हालांकि इस पूरे प्रकरण के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से पर्यटकों के साथ संवाद को बेहतर बनाने और रोक के दौरान सूचना देने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किए जाने की मांग उठने लगी है। फ़िलहाल यह मामला पर्यटन सीज़न के बीचोंबीच चर्चा का विषय बना हुआ है, और उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी के बाद यह बहस राजनीतिक रंग भी ले चुकी है। यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आधिकारिक विवरण प्रशासन की पुष्टि के अधीन हैं।

