Noida Sector 39: नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र अंतर्गत सलारपुर चौकी के सब-इंस्पेक्टर (SI) यशवंत सिंह पर पत्रकारों से कथित बदसलूकी और अभद्र व्यवहार का आरोप सामने आया है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान SI ने पत्रकारों के सिर पर हाथ रखकर अभद्र व्यवहार किया और कहा—“ऐ मरवाते ट्वीट हैं और ट्वीट खेलते रहते हैं, ट्वीट खेलते रहो।”
यह आरोप मंगलवार (18 अगस्त 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कुछ स्थानीय और न्यूज अकाउंट्स द्वारा उठाया गया। पोस्ट्स में @noidapolice, @CP_Noida, @Uppolice, @dgpup, @UPGovt और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पुलिस अधिकारी को पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।
क्या है पूरा मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना सेक्टर-39 थाना क्षेत्र के सलारपुर चौकी से जुड़ी बताई जा रही है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान SI यशवंत सिंह पर यह आरोप लगा है कि उन्होंने न केवल शारीरिक रूप से सिर पर हाथ रखकर अभद्र व्यवहार किया, बल्कि सोशल मीडिया (ट्वीट) को लेकर अपमानजनक और धमकी भरी टिप्पणी भी की। आरोप यह भी है कि यह व्यवहार पत्रकारों के पेशेवर काम को लेकर था। फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत या FIR दर्ज होने की पुष्टि बड़े मीडिया माध्यमों या पुलिस के आधिकारिक बयान से नहीं हुई है। मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नोएडा पुलिस या गौतमबुद्ध नगर पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पत्रकारों के साथ व्यवहार और कानूनी पहलू
भारत में पत्रकारों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। पुलिस अधिकारियों से पेशेवर शिष्टाचार की अपेक्षा की जाती है। किसी भी नागरिक (खासकर मीडियाकर्मी) के साथ अभद्र व्यवहार, अपमानजनक टिप्पणी या शारीरिक छेड़छाड़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दंडनीय हो सकती है। कई पूर्व मामलों में पुलिस अधिकारियों पर पत्रकारों से बदसलूकी के आरोप लगने पर विभागीय जांच और कार्रवाई हुई है। सोशल मीडिया पर इस आरोप को उठाते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि क्या पुलिस अधिकारी को पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार है? साथ ही मौके पर मौजूद लोगों के बयानों की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आगे क्या?
यह मामला अभी आरोप के स्तर पर है। नोएडा पुलिस को चाहिए कि वह इस आरोप की शीघ्र और निष्पक्ष जांच करे। सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध हो), मौके पर मौजूद गवाहों के बयान और संबंधित पत्रकारों के बयान दर्ज कर वास्तविकता सामने लाई जानी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप गलत निकले तो झूठी खबर फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। नोएडा जैसे संवेदनशील इलाके में पुलिस और मीडिया के बीच पेशेवर रिश्ते बनाए रखना दोनों पक्षों के लिए जरूरी है। कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों से शिष्टाचार और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। यह रिपोर्ट उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट्स और आरोपों पर आधारित है। आधिकारिक पुष्टि या पुलिस बयान आने पर अपडेट किया जाएगा।

