Snake Venom Party Noida: फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव पर नोएडा की पार्टियों में नशे के लिए सांप के जहर के इस्तेमाल का आरोप लगने के बाद यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि क्या उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में वाकई स्नेक बाइट यानी सांप के जहर का नशा किया जा रहा है। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए एक विस्तृत पड़ताल की गई, जिसमें नोएडा और दिल्ली-NCR के कई क्लबों तक पहुंच बनाई गई और नशे के इस अवैध कारोबार की परतें खोली गईं।
कैसे शुरू हुई पड़ताल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली-NCR में स्नेक बाइट पार्टियों का चलन बढ़ रहा है, जिनमें यूपी के युवा भी शामिल हो रहे हैं। नोएडा और दक्षिणी दिल्ली के हौज खास इलाके के कुछ क्लबों को इसका केंद्र बताया गया। यहां मौजूद एक डांसर के जरिए इस नशे के नेटवर्क की पहली जानकारी मिली, जिसने आगे क्लब के बाहर मौजूद एक पेडलर से मुलाकात करवाई। यह पेडलर सांपों की सप्लाई से भी जुड़ा हुआ निकला। पेडलर ने बताया कि यह नशा प्रतिबंधित है और महंगा भी, इसलिए सामान जुटाने में समय लगता है। बातचीत के दौरान उसने खुलासा किया कि हरियाणा के सोनीपत में सपेरों की एक बस्ती है, जहां से यूपी के क्लबों तक सांपों की सप्लाई होती है।
सोनीपत के सपेरों तक पहुंच
चार दिन बाद टीम सोनीपत की उस बस्ती में पहुंची। पहचान छिपाने के लिए एक स्थानीय महिला सहयोगी को साथ रखा गया, क्योंकि अजनबियों से सपेरे आमतौर पर बात करने से बचते हैं। भरोसा जीतने में करीब चार दिन का वक्त लगा, जिसके बाद एक कच्चे मकान में सांपों के सप्लायरों से मुलाकात हो सकी। सप्लायरों ने कोबरा, करैत और दोमुंहा जैसे जहरीले सांप उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि वे पहले भी उज्जैन, मंडी, कसौल और चंडीगढ़ जैसे शहरों में सप्लाई कर चुके हैं। पांच लोगों के लिए करीब 16 घंटे के “नशे” की डिलीवरी के एवज में उन्होंने 70 हजार रुपए का रेट बताया, जिसमें से 30 हजार रुपए एडवांस मांगे गए। सप्लायरों ने यह भी दावा किया कि कुछ ग्राहकों से पहले डेढ़ से दो लाख रुपए तक वसूले जा चुके हैं।
जहरीले सांप के जहर को “कम” करने का दावा
पड़ताल में सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि सप्लायर जानलेवा जहर को कथित तौर पर इस स्तर तक घटाने का दावा करते हैं कि पीड़ित को गहरी बेहोशी तो हो, लेकिन मौत न हो। सामान्य तौर पर कोबरा जैसे सांप का डंक 12 से 24 घंटे में जानलेवा साबित हो सकता है। सप्लायरों के मुताबिक, बार-बार सांप को एक डिब्बे पर कटवाकर उसका अधिकांश जहर पहले ही निकाल लिया जाता है, ताकि डंक मारने पर सिर्फ लंबी सुस्ती या बेहोशी हो, जान का खतरा न रहे। विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक मानते हैं, क्योंकि जहर की मात्रा का सटीक अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन है और यह जानलेवा साबित हो सकता है।
आखिर युवा इस जानलेवा नशे की ओर क्यों जा रहे हैं
सांप के डंक से चक्कर आना, गहरी सुस्ती और बेहोशी जैसे लक्षण होते हैं, जो जहर के असर से पैदा होते हैं। दावा किया जाता है कि यह असर आम नशीले पदार्थों के मुकाबले कहीं ज्यादा देर, यानी करीब 24 घंटे तक बना रह सकता है, जबकि सामान्य नशा कुछ ही घंटों में उतर जाता है। यही “लंबे असर” का लालच कुछ युवाओं को इस ओर खींच रहा है, भले ही यह जानलेवा साबित हो सकता है और शरीर को लकवाग्रस्त तक कर सकता है।
ऑन-डिमांड सप्लाई से मुश्किल हुई निगरानी
जांच में यह भी सामने आया कि यह नशा पूरी तरह “ऑन-डिमांड” तरीके से कराया जाता है। क्लबों और प्राइवेट पार्टियों में आयोजक सीधे सप्लायर को बुलाते हैं, जो मौके पर पहुंचकर सांप का डंक कराता है। इसी वजह से जांच एजेंसियों या मीडिया के लिए सीधे तौर पर नशा करने वालों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जबकि नेटवर्क सोनीपत जैसे इलाकों से लेकर NCR के पॉश क्लबों तक फैला हुआ है। पड़ताल के दौरान सांपों को कैमरे में रिकॉर्ड करने के बाद डील को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया, क्योंकि मकसद इस अवैध नेटवर्क की परतें उजागर करना था। यह रिपोर्ट सार्वजनिक हित में की गई पड़ताल पर आधारित है। सांप के जहर का सेवन जानलेवा है और यह वन्यजीव संरक्षण कानूनों का भी उल्लंघन है।

