PM Modi Red Fort Speech: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते हुए विकसित भारत 2047 का साफ और महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। करीब एक घंटे से अधिक लंबे भाषण में उन्होंने आर्थिक परिवर्तन, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, युवा शक्ति और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों को एक साथ जोड़ा। भाषण की सबसे चर्चित बातें रहीं—‘सप्तधारा’ विजन, ‘दिमागी नक्सल’ की चेतावनी, 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग और 2036 ओलंपिक के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट।
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद देश के पास कई सपने थे, लेकिन गति नहीं पकड़ पाई। “हमें ‘होती है, चलती है, हो जाएगा’ वाली सोच ने बांध रखा था। 2014 तक दुनिया ने हमें ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में गिन लिया था। लेकिन पिछले 12 साल में भारत ने नई रफ्तार पकड़ी है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है।” उन्होंने याद दिलाया कि इन 12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी और ग्रामोद्योग पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सात गुना बढ़ी। मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना और डिजिटल लेनदेन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ।
सप्तधारा: विकसित भारत की सात धाराएं
पीएम ने प्राचीन ‘सप्त सिंधु’ की याद दिलाते हुए कहा कि अब विकसित भारत के लिए नई धारा चाहिए। उन्होंने ‘सप्तधारा’ यानी शक्ति की सात धाराओं का आह्वान किया। अगले पांच-सात साल में पिछले पांच-सात दशकों में नहीं हो सका काम पूरा करने का लक्ष्य रखा।
ये सात धाराएं हैं:
- मैन्युफैक्चरिंग शक्ति – लागत, गुणवत्ता और स्केल पर फोकस। छोटे पार्ट्स से लेकर बड़े उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन देश में। गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं, यही ब्रांड वैल्यू बने।
- कृषि और फूड प्रोसेसिंग – किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना, बाजरा, मसाले, फल-सब्जियां ब्रांड बनें।
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन – AI, क्वांटम, स्पेस, रोबोटिक्स, डेटा सेंटर। भारत सिर्फ बाजार न बने, ग्लोबल हब बने।
- गति शक्ति – हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स।
- रक्षा शक्ति – आत्मनिर्भर रक्षा, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक।
- ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी – ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी के साथ समुद्री अर्थव्यवस्था।
- सॉफ्ट पावर – योग, आयुर्वेद, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत।
उन्होंने कहा कि युवा शक्ति को इन धाराओं से जोड़ना होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और सेमीकंडक्टर पर जोर
ऊर्जा सुरक्षा को समय की मांग बताते हुए पीएम ने परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा। 2047 तक 100 गीगावॉट (कुछ रिपोर्टों में 200 गीगावॉट का जिक्र) परमाणु क्षमता और इस दशक में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि पहले 99 प्रतिशत ऑफशोर क्षेत्रों को ‘नो-गो’ बना दिया गया था, अब उन्हें खोला जा रहा है। पाइप्ड गैस शहरों की संख्या 70 से बढ़कर 700 हो गई है और सोलर क्षमता 2 गीगावॉट से 160 गीगावॉट पहुंची है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तीन बड़े प्लांट शुरू हो चुके हैं और निर्यात भी शुरू हो गया है। अगले सात-आठ साल में पांच से आठ और प्लांट आने की संभावना जताई। दुर्लभ मृदा (रेयर अर्थ) और गैस एक्सप्लोरेशन पर भी जोर दिया।
युवाओं और जेन-जेड के लिए बड़े ऐलान
भाषण में युवा वर्ग खास फोकस में रहा। पीएम ने कहा कि अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे वैश्विक AI क्षेत्र में लीडर बन सकें। स्टार्टअप्स से कहा—विचार लेकर आओ, संसाधनों की कमी नहीं होने देंगे। एक लाख करोड़ रुपये का सिस्टम तैयार है। खेलों में 2036 ओलंपिक के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट की घोषणा की। 5 से 15 साल के बच्चों की गांवों, शहरों और स्कूलों में पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भी याद दिलाई। युवाओं से डिजिटल जनगणना में सक्रिय भागीदारी की अपील की—“एक घंटा दीजिए।” वैश्विक महत्वाकांक्षाएं भी रखीं—अगले दशक में 50 भारतीय कंपनियां फॉर्च्यून 500 में हों, एक भारतीय बैंक दुनिया के टॉप-5 में और फार्मा कंपनियां भी वैश्विक टॉप-5 में जगह बनाएं।
दिमागी नक्सल पर सख्त चेतावनी
आंतरिक सुरक्षा पर पीएम ने कहा कि सशस्त्र नक्सल और माओवादी हिंसा अब अंतिम सांसें ले रही है। 3500 से अधिक सुरक्षा कर्मी शहीद हुए। नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास का तिरंगा लहरा रहा है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी—“हथियार वाले नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। वे हिंसा और अराजकता के रास्ते खोद रहे हैं। इन्हें पहचानना और अलग करना होगा। युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।” पीएम ने बताया कि पहले माओवादी विचारधारा वाले लोग सत्ता के गलियारों और सरकारी समितियों में भी पहुंचे थे। अब सशस्त्र खतरा लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन वैचारिक खतरे के प्रति सतर्क रहना जरूरी है।
सांस्कृतिक छवि और अन्य बातें
पीएम ने परंपरा के अनुरूप मैरून बैंधनी साफा पहना, जो राजस्थान की सदियों पुरानी शिल्पकला का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ गूंजा। देश को छोटे सपनों से आगे बढ़कर बड़े लक्ष्य तय करने की सलाह दी। भाषण में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल पर जोर देते हुए कहा गया कि भारत अब दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता। विश्व व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ किसानों, मछुआरों और MSME को उठाना होगा।
कुल मिलाकर पीएम मोदी का यह भाषण सिर्फ उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि अगले दो दशकों का स्पष्ट ब्लूप्रिंट था—जहां आर्थिक ताकत, तकनीकी आत्मनिर्भरता, युवा ऊर्जा और वैचारिक सतर्कता को एक साथ जोड़कर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने की बात कही गई। देश अब ‘फ्रैजाइल फाइव’ से निकलकर वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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