रांची की सड़कों पर ‘जंतर-मंतर’ जैसा बवाल! छात्रों पर लाठियां चलीं तो गरमाई दिल्ली की राजनीति—आखिर क्यों चुप हैं शाह और मोदी?

रांची / नई दिल्ली:झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर JSSC CGL) में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। राजधानी रांची में हजारों की संख्या में छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। इस दौरान पुलिस और उग्र छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद भीड़ को तीतर-बीतर करने के लिए पुलिस ने हल्के बल (लाठीचार्ज) का प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

दिनभर चले तनावपूर्ण माहौल के बाद शाम होते-होते छात्र वापस लौट गए, लेकिन इस घटना ने राज्य से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक भूचाल ला दिया है। अब इस पूरे घटनाक्रम को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले ऐतिहासिक आंदोलनों से जोड़कर देखा जा रहा है।

1. क्या रांची के छात्र आंदोलन की तुलना जंतर-मंतर से हो सकती है?

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रांची का यह छात्र प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर के जन-आंदोलनों जैसी गूंज पैदा कर रहा है।

 समानता: जिस प्रकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग न्याय और अधिकारों की मांग को लेकर पहुंचते हैं, ठीक उसी तरह झारखंड के दूर-दराज इलाकों से आए युवा अपनी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर एकत्र हुए।

 मुद्दे की गंभीरता: पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार अब केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। यही कारण है कि इस क्षेत्रीय आंदोलन की तुलना जंतर-मंतर के राष्ट्रीय विरोध-प्रदर्शनों से की जा रही है।

2. झारखंड में BJP आक्रामक, लेकिन केंद्र स्तर पर चुप्पी? उठे कई सवाल

इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प पहलू राजनीतिक दलों का विरोधाभासी रुख है:

 झारखंड में भाजपा का विरोध: राज्य स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से छात्रों के समर्थन में खड़ी है। प्रदेश भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने और लाठीचार्ज कराने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 केंद्र का रुख और सवाल: दूसरी तरफ, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से सीधा बयान न आने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का पूछना है कि यदि राज्य में धांधली और छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ है, तो शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व इस पर सार्वजनिक रूप से खुलकर विरोध दर्ज क्यों नहीं कर रहा?

 संसद का घेराव और अमित शाह: विपक्षी नेताओं का यह भी कहना है कि जब संसद सत्र के दौरान परीक्षाओं में धांधली और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा की मांग होती है, तो गृह मंत्री अमित शाह या संबंधित केंद्रीय मंत्री इस विषय पर सीधे बयान देने से बचते दिखते हैं।

3. राहुल गांधी का हमला: “हम छात्रों के साथ हैं, लाठीशाही नहीं चलेगी”

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। राहुल गांधी बार-बार देश भर में हो रहे पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं।

युवाओं को रोजगार मांगने और निष्पक्ष परीक्षा की मांग करने पर लाठियां मिल रही हैं। हम छात्रों के इस संघर्ष में उनके साथ हैं और इस दमनकारी नीति का खुलकर विरोध करते हैं।”

— राहुल गांधी

राहुल गांधी का यह रुख दर्शाता है कि विपक्ष इस मुद्दे को सीधे तौर पर केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकार की प्रशासनिक विफलताओं से जोड़कर भुनाने की कोशिश में है।

4. आगे क्या? राजनीतिक बयानबाजी के बीच फंसा युवाओं का भविष्य

झारखंड में छात्रों का कहना है कि वे किसी राजनीति का शिकार नहीं होना चाहते; उनकी मांग बेहद सीधी है:

1. परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष और CBI जांच हो।

2. दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

3. भावी परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और सख्त कानून लागू किए जाएं।

शाम होते-होते भले ही रांची की सड़कों से छात्र अपने घरों को लौट गए हों, लेकिन इस आंदोलन ने राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार के सामने भी कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकारें केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाएंगी या युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगी।

 

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