Noida District Hospital Emergency: नोएडा। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं एक बार फिर विवादों में आ गई हैं। स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजन उसे रात करीब 11 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। करीब आधे घंटे तक मरीज इलाज के इंतजार में तड़पती रही। निराश होकर परिजन घायल बच्ची को निजी अस्पताल ले गए और वहां भर्ती कराया।
परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर नदारद थे। न तो कोई चिकित्सक आया और न ही प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। उन्होंने जिला अस्पताल के सीएमएस और डॉक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आए दिन इमरजेंसी में ऐसी लापरवाही बरती जाती है और कई मरीज बिना इलाज के वापस लौट जाते हैं।
यह घटना नोएडा जिला अस्पताल की आपात सेवाओं की बदहाली को फिर उजागर करती है। अस्पताल में पहले भी कई बार इमरजेंसी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, व्यवस्था की कमी और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हाल के महीनों में सीलिंग गिरने, डायलिसिस यूनिट में गंदगी, सिरिंज घोटाले और अन्य अनियमितताओं की खबरें भी आती रही हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पताल होने के बावजूद आपात स्थिति में मरीजों को उचित समय पर इलाज नहीं मिल पाता। घायल छात्रा की हालत को देखते हुए वे इंतजार नहीं कर सके और निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से सीएमएस और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान फिलहाल उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे इमरजेंसी सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें, रात की ड्यूटी पर डॉक्टरों की उपस्थिति की जांच करें और मरीजों की जान से खिलवाड़ रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। नोएडा जैसे बड़े शहर में सरकारी जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं राम भरोसे चल रही हों तो आम नागरिकों का भरोसा कैसे बनेगा यह सवाल अब प्रशासन के सामने है।
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