Mark Zuckerberg: नई दिल्ली, मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की मूल कंपनी) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और संचालन संबंधी गलतियों के लिए भारत सरकार से माफी मांगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह माफी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ दो दिवसीय उच्च स्तरीय परामर्श के दौरान दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने हानिकारक कंटेंट के प्रसार और कंटेंट मॉडरेशन में कमियों पर पछतावा जताया। बैठक में प्लेटफॉर्म जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर चर्चा हुई। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाने के मुद्दे का इस माफी में कोई जिक्र नहीं किया गया। सरकार ने मेटा को साफ बताया कि कंपनी ‘इंटरमीडियरी’ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती, क्योंकि उसके एल्गोरिदम तय करते हैं कि कंटेंट किसे दिखे। इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा उन पर लागू नहीं होती। मेटा ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई और इस गलती पर पछतावा जताया।
यह घटनाक्रम संसदीय समिति के दबाव के बीच आया है। आईटी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा से पीएम मोदी के वीडियो (जो करीब पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म से गायब रहा) को हटाने के लिए जुकरबर्ग से व्यक्तिगत माफी मांगी थी। मेटा ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया था, लेकिन सरकार ने इसे पर्याप्त नहीं माना। मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कापलान समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने MeitY सचिव एस कृष्णन से मुलाकात की। चर्चा में CSAM, डीपफेक और सत्यापित खातों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल रहे। यह मामला अभी भी विकसित हो रहा है। सरकार प्लेटफॉर्म पर सख्त जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।

