नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर गहरा गई है। सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी हॉस्टल ढहने की त्रासदी (6 सितंबर 2026) के ठीक एक महीने बाद बुधवार (7 अक्टूबर 2026) को पूर्वोत्तर दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक बहुमंजिला आवासीय इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच बचाव अभियान जोर-शोर से चल रहा है।
इदगाह मछली मंडी के पास ई-ब्लॉक में स्थित लगभग 25 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी चार-पांच मंजिला इमारत (कुछ रिपोर्टों में तीन-चार मंजिला भी बताया गया) का अगला हिस्सा दोपहर करीब 3:15 से 3:30 बजे के बीच ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इमारत में जमीनी मंजिल पर दुकानें और ऊपरी मंजिलों पर आवासीय यूनिट थीं। मलबा पड़ोसी दो-तीन घरों पर भी गिरा, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिलते ही कई दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। पुलिस, एमसीडी, नागरिक सुरक्षा और अन्य एजेंसियों की टीमें भी पहुंचीं। शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीना के अनुसार अब तक सात लोगों को सुरक्षित या घायल अवस्था में बाहर निकाला जा चुका है। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ रिपोर्टों में पांच से आठ घायलों का जिक्र है, जबकि एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। कुछ लोग अभी भी मलबे में फंसे बताए जा रहे हैं और वे संपर्क में भी हैं। जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से बचाव कार्य जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगलवार रात उत्तराखंड के चमोली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें आ गई थीं। कुछ निवासी पहले ही बाहर निकल चुके थे, लेकिन इमारत अचानक ढह गई। अधिकारियों ने भूकंप को सीधा कारण मानने से इनकार किया है और जांच का इंतजार करने की बात कही है। इमारत करीब 40-50 साल पुरानी बताई जा रही है और अनधिकृत कॉलोनी में बनी मानी जाती है।
सत्य निकेतन की याद ताजा
यह हादसा 6 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में हुई बड़ी त्रासदी की याद ताजा करता है। वहां पांच मंजिला पीजी (हॉस्टल डेज) ढहने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। 12 लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि मालिक के निर्देश पर बेसमेंट को मलबे (करीब तीन ट्रक) से भरकर ग्राउंड फ्लोर के स्तर पर लाया गया और हादसे वाले दिन एक महत्वपूर्ण दीवार हटा दी गई, जिससे संरचना कमजोर हो गई। इमारत में अनधिकृत मंजिलें थीं, स्वीकृत नक्शा और फायर एनओसी नहीं थे। मालिक हरिराम गुप्ता समेत परिवार के सदस्यों और ठेकेदार को गिरफ्तार किया गया। एमसीडी के पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया गया।
उसके बाद एमसीडी ने शहर भर में अभियान चलाया। सैकड़ों अनधिकृत और खतरनाक इमारतों को सील या गिराया गया। सत्य निकेतन और अन्य पीजी हब में सर्वेक्षण हुए। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी विश्वविद्यालय हॉस्टल की कमी और निजी पीजी की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे।
बार-बार दोहराया जा रहा सिलसिला
दिल्ली में इमारत ढहने की घटनाएं नई नहीं हैं। अनधिकृत निर्माण, कमजोर नींव, बारिश के पानी का जमाव, मरम्मत के नाम पर संरचनात्मक बदलाव और निगरानी की कमी बार-बार हादसों का कारण बनते हैं। सीमापुरी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में छोटी-छोटी जगहों पर ऊंची इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं। सत्य निकेतन जैसी घटनाओं के बाद कार्रवाई होती है, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर लगता है।
वर्तमान में सीमापुरी में बचाव कार्य प्राथमिकता है। यातायात पुलिस ने सीमापुरी गोल चक्कर, डीएलएफ भोपुरा और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की चेतावनी दी है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे मौके पर जमा न हों ताकि एम्बुलेंस और बचाव वाहन आसानी से आ-जा सकें। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सटीक कारणों की जांच चल रही है। इस बीच दिल्लीवासियों के मन में फिर वही सवाल गूंज रहा है—क्या हमारी इमारतें सुरक्षित हैं? और कब तक ये हादसे रुकेंगे?
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