PM Modi abuse controversy: सीजेपी प्रोटेस्ट में RAF को ‘नीला हार्पिक’ और पीएम को गाली देने वाले रील्स वायरल, अब ट्रोलिंग-थ्रेट का शिकार बनीं कंटेंट क्रिएटर्स; बीबीसी ने विक्टिम नैरेटिव चलाया, भूमि पेडनेकर पर भी हमला

PM Modi abuse controversy: नई दिल्ली। जून-जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन ने सिर्फ परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे को ही नहीं उठाया, बल्कि सोशल मीडिया की जवाबदेही, कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं और सेलेक्टिव नैरेटिव का नया अध्याय भी खोल दिया। प्रोटेस्ट के दौरान कुछ युवा कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा सुरक्षा बलों और प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक रील्स बनाए गए। बाद में जब इन रील्स पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए तो वही क्रिएटर्स ट्रोलिंग, गाली-गलौज और धमकियों का शिकार बताए जाने लगे। बीबीसी जैसे प्लेटफॉर्म्स ने इनमें से एक को विक्टिम के रूप में पेश किया, जबकि भूमि पेडनेकर जैसी हस्तियों ने गाली-गलौज की संस्कृति को गलत बताया तो खुद आलोचना का शिकार हो गईं।

क्या हुआ था सीजेपी प्रोटेस्ट में?

सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) मई 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी के बाद ऑनलाइन सैटायर मूवमेंट के रूप में उभरी थी। बाद में यह NEET सहित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आई। जुलाई में जंतर-मंतर पर लंबा धरना चला। इस दौरान कई युवा कंटेंट क्रिएटर्स वहां पहुंचे और रील्स बनाईं।

इनमें 23 वर्षीय योगा इंस्ट्रक्टर और कंटेंट क्रिएटर श्रद्धा सिंह की रील सबसे ज्यादा चर्चा में रही। उन्होंने नीली वर्दी में बैठे रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) जवानों के सामने खड़े होकर टॉयलेट क्लीनर के विज्ञापन को रीक्रिएट किया। उन्होंने कहा— “नीला वाला टॉयलेट के लिए, लाल वाला बाथरूम के लिए।” यह वीडियो वायरल हुआ। आलोचकों ने इसे सुरक्षा बलों का अपमान बताया। श्रद्धा ने बाद में वीडियो डिलीट कर माफी मांगी और कहा कि उनका मकसद मजाक उड़ाना नहीं था, बल्कि रंगों से जुड़े विज्ञापन का ख्याल आ गया था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो पोस्ट के एक घंटे के अंदर ही डिलीट कर दिया था, लेकिन मीम पेजों ने उसे फैला दिया। इसी प्रोटेस्ट में रुचिका सिंह का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। रुचिका ने बाद में माफी मांगी और दावा किया कि वे सिर्फ 15 वर्ष की हैं तथा आसपास के माहौल से प्रभावित होकर बोल गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद युवाओं को माफ करने की अपील की और कहा कि गलतियां युवावस्था में होती हैं, उन्हें सुधारने का मौका देना चाहिए।

ट्रोलिंग का दावा और बीबीसी का इंटरव्यू

श्रद्धा सिंह अब कह रही हैं कि उन्हें रेप और हत्या की धमकियां मिल रही हैं, परिवार को टैग करके गाली दी जा रही है और उनका करियर प्रभावित हो गया है। वे घर से निकलने में डर रही हैं। बीबीसी हिंदी ने 1-2 अगस्त 2026 के आसपास उनका इंटरव्यू प्रसारित किया। संवाददाता दिलनवाज पाशा के साथ हुई बातचीत में श्रद्धा ने बताया कि प्रोटेस्ट के दौरान किसी लड़के ने बैड टच नहीं किया और माता-पिता ने उन्हें अच्छे संस्कार दिए। उन्होंने ट्रोलिंग और धमकियों का जिक्र किया। शूटिंग और एडिटिंग में मोहम्मद महरोज मीर, मुसावीर शब्बीर आदि नाम जुड़े रहे। आलोचक कह रहे हैं कि जब इन्हीं क्रिएटर्स ने RAF जवानों का मजाक उड़ाया, प्रोटीन शेक पीकर लाठीचार्ज का मजाक बनाया या बच्चों को मंत्री-प्रधानमंत्री के खिलाफ गाली बोलने के लिए प्रेरित किया, तब मीडिया और लिबरल इकोसिस्टम ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उल्टा अब जब सोशल मीडिया यूजर्स जवाबदेही मांग रहे हैं तो इसे ‘बीजेपी-आरएसएस ट्रोलिंग’ बताकर विक्टिम कार्ड खेला जा रहा है।

भूमि पेडनेकर का बयान और बैकलैश

अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने प्रोटेस्ट वीडियोज में इस्तेमाल हो रही गाली-गलौज पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के युवा किसी के खिलाफ, खासकर देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते। क्या हम घर के बड़े-बुजुर्गों से ऐसे बात करते हैं? यह हमारी संस्कृति नहीं है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। कई यूजर्स ने उन्हें ‘सेलेक्टिव’ बताया और लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए आलोचना की। भूमि ने बाद में रेप-डेथ थ्रेट्स की निंदा भी की, लेकिन आलोचक इसे ‘डैमेज कंट्रोल’ बता रहे हैं।

अकाउंटेबिलिटी का सवाल

सोशल मीडिया दोतरफा प्लेटफॉर्म है। जहां व्यूज, फॉलोअर्स और कमाई मिलती है, वहां आलोचना और जवाबदेही भी उसी पैकेज का हिस्सा है। जब तक अपमानजनक कंटेंट किसी राजनीतिक नैरेटिव में फिट बैठता है, उसे मनोरंजन माना जाता है। जैसे ही उसी कंटेंट पर सवाल उठते हैं, तो उसे ट्रोलिंग या साजिश बता दिया जाता है। बीबीसी जैसे संस्थानों पर आरोप है कि वे सेलेक्टिव नैरेटिव चलाते हैं— एक तरफ श्रद्धा सिंह को विक्टिम दिखाते हैं, दूसरी तरफ भूमि पेडनेकर जैसी आवाजों को नजरअंदाज करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंटेंट क्रिएटर्स को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सुरक्षा बलों या संवैधानिक पदों का अपमान मनोरंजन नहीं हो सकता। साथ ही, व्यक्तिगत धमकियां, रेप थ्रेट्स या परिवार को निशाना बनाना भी स्वीकार्य नहीं। कानून दोनों तरफ लागू होना चाहिए।

सीजेपी आंदोलन ने शिक्षा सुधारों पर सरकार को दबाव बनाया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंच गया। लेकिन इसके साथ जुड़े कुछ वीडियोज ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया की आजादी के साथ जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। सेलेक्टिव विक्टिमहुड और सेलेक्टिव आउटरेज दोनों लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं। अगस्त 2026 की शुरुआत तक श्रद्धा सिंह कई इंटरव्यू दे चुकी हैं, रुचिका सिंह की माफी का वीडियो वायरल है और भूमि पेडनेकर पर बहस जारी है।

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