The coal mafia in Greater Noida West: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कोयला माफिया के मिले तीन फ्लैट और आठ प्लॉट, ईडी ने झारखंड में की थी रेड| झारखंड के कोयला माफिया से जुड़े कारोबारियों के ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तीन फ्लैट और आठ कमर्शल प्लॉट मिले हैं। यह खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस छापेमारी के दौरान हुआ, जो पिछले हफ्ते धनबाद में कई कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर की गई थी। झारखंड का धनबाद जिला ‘ब्लैक डायमंड’ यानी कोयले की राजधानी के नाम से जाना जाता है, और यहीं से जुड़े सिंडिकेट के तार अब दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचते नजर आ रहे हैं।
धनबाद में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
ईडी ने पिछले सप्ताह धनबाद में अवैध कोयला खनन, रंगदारी, लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच टीम ने धनबाद के प्रमुख कोयला कारोबारियों और आउटसोर्सिंग ठेकेदारों के 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई में कोयला कारोबारी लाल बाबू सिंह और व्यापारी अनिल गोयल के सहयोगियों के ठिकानों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
छापेमारी में मिले ग्रेनो वेस्ट के संपत्ति दस्तावेज
छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आठ कमर्शल प्लॉट और तीन फ्लैट की बुकिंग के कागजात शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि इन संपत्तियों की खरीद नकद (कैश) में की गई थी, जिसके सबूत भी ईडी के हाथ लगे हैं। इस मामले में जांच आगे बढ़ाने के लिए ईडी ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (अथॉरिटी) से संपर्क साधा है। कोयला व्यापारी अनिल गोयल के ठिकानों पर हुई छापेमारी में 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद हुए, जिनमें दिल्ली-एनसीआर में किए गए भारी निवेश के साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा उनके यहां से दर्जनों बैंक खातों के दस्तावेज भी जब्त किए गए, जिनमें से कुछ खाते नोएडा के दो निजी बैंकों से भी जुड़े पाए गए हैं।
एनसीआर में कोयला कारोबारियों का मोटा निवेश
ईडी की रांची जोनल टीम ने धनबाद में छापेमारी के दौरान एलबी सिंह (लाल बाबू सिंह) के परिसरों से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज कर दिया है। अब तक की जांच में कुल मिलाकर 600 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियों का पता चला है। बेनामी संपत्तियों की जांच की कड़ी में नोएडा के अलावा गुड़गांव और गाजियाबाद में भी रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश के सबूत मिले हैं, जिनके सत्यापन का काम शुरू कर दिया गया है।
अवैध कमाई से बनी संपत्ति होगी कुर्क
ईडी की इस पूरी कार्रवाई का मकसद अपराध की कमाई से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करना है। 600 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती इस बात का संकेत है कि देश में कोयला सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी और फैली हुई हैं। 600 करोड़ की अचल संपत्ति और 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड फ्रीज होने के बाद अब जांच एजेंसी उन सफेदपोश नेताओं और नौकरशाहों तक पहुंचने की तैयारी में जुट गई है, जिनके संरक्षण में यह पूरा कोयला सिंडिकेट संचालित हो रहा था।

