Gorakhpur massacre: गोरखपुर के खजनी कस्बे में सराफा कारोबारी हनुमान वर्मा के 10 वर्षीय बेटे वैभव वर्मा का अपहरण कर हत्या कर दी गई। सोमवार दोपहर स्कूल से लौटकर साइकिल लेकर निकला मासूम रहस्यमय हालात में लापता हो गया था। पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले कंप्यूटर शिक्षक सर्वेश भट्ट को गिरफ्तार कर उसके घर के बेसमेंट से शव बरामद किया।
गोरखपुर के खजनी कस्बे के प्रतिष्ठित सराफा कारोबारी लक्ष्मी नारायण वर्मा के परिवार पर एक महीने के भीतर दूसरी बार दुखों का पहाड़ टूटा है। बेटे हनुमान वर्मा की पत्नी की मौत के करीब एक माह बाद ही अब उनके 10 वर्षीय पौत्र वैभव वर्मा की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। इस वारदात ने पूरे कस्बे को हिलाकर रख दिया है।
स्कूल से लौटकर साइकिल लेकर निकला था वैभव
जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब दो बजे वैभव स्कूल से घर लौटा था। उसने बैग रखा, यूनिफॉर्म बदली और नई साइकिल लेकर घर से निकल गया। कुछ ही देर बाद उसकी साइकिल लावारिस हालत में मिली और पास के खेत से एक चप्पल बरामद हुई। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।
सीसीटीवी में दिखा पड़ोसी टीचर, 24 घंटे बाद खुला राज
पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो वैभव के पीछे पड़ोस में रहने वाला कंप्यूटर शिक्षक सर्वेश भट्ट जाता दिखाई दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। करीब 24 घंटे चले सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार दोपहर पुलिस ने आरोपी के घर के बेसमेंट से वैभव का शव बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सर्वेश भट्ट को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में सर्वेश भट्ट की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसकी निशानदेही पर बेसमेंट से शव बरामद किया गया। पुलिस हत्या के कारण और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
शव मिलते ही फूटा गुस्सा, थाने का घेराव
बच्चे का शव मिलने की खबर फैलते ही खजनी कस्बे में भीड़ जुट गई। आक्रोशित व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने खजनी-सिकरीगंज और खजनी-मल्हनपार मार्ग जाम कर दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग खजनी थाने पहुंचे और घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के एनकाउंटर, उसके मकान पर बुलडोजर चलाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कठोर सजा दिलाने की मांग की।
करीब चार घंटे जाम रहा मुख्य मार्ग, डीएम-एसपी ने की वार्ता
मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे परिजन और स्थानीय लोगों ने खजनी-सिकरीगंज-बांसगांव मुख्य मार्ग जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सूचना मिलते ही एसएसपी डॉ. कौस्तुभ, डीएम दीपक मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। इस दौरान थाने में बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंच गईं, जहां पुलिस से कहासुनी और हल्की झड़प की स्थिति बनी। भीड़ के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आरोपी और उसके परिवार को सुरक्षित स्थान पर भेजा तथा आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद शाम करीब 4:20 बजे जाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल हुआ। एहतियातन कस्बे में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रखा गया है।
एक महीने में दूसरी बार टूटा परिवार
लक्ष्मी नारायण वर्मा के पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़े बेटे त्रिभुवन वर्मा, दूसरे नंबर के हनुमान वर्मा और सबसे छोटे उमाशंकर खजनी में सराफा कारोबार संभालते हैं, जबकि तीसरे नंबर के द्वारिका वर्मा एम्स में डॉक्टर हैं। करीब एक माह पहले हनुमान की पत्नी श्वेता के निधन के बाद पूरा परिवार उनके तीनों बच्चों को संभालने में जुटा था। सबसे छोटा होने के कारण वैभव दादा-दादी की आंखों का तारा था। अब घर में उसकी किताबें, साइकिल और खिलौने तो हैं, लेकिन उन्हें संभालने वाला मासूम हमेशा के लिए खामोश हो चुका है।

