Anti-Paper Leak Bill passed in Lok Sabha: नई दिल्ली, लोकसभा ने बुधवार (29 जुलाई 2026) को विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक 2024 के मौजूदा एंटी पेपर लीक कानून को और सख्त बनाता है। सरकार ने इसे सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने वाला मजबूत कदम बताया, जबकि विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन, जंतर-मंतर की घटना और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयक में क्या-क्या बड़े बदलाव?
2024 के कानून में अनुचित साधनों के लिए 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना था। नए संशोधन में, व्यक्तिगत अपराधों के लिए न्यूनतम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल, जुर्माना 50 लाख रुपये तक। संगठित परीक्षा अपराधों (माफिया) के लिए न्यूनतम 7 साल (अधिकतम 10 साल) की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना। सेवा प्रदाताओं (एजेंसियों) पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 8 साल तक परीक्षा आयोजित करने पर रोक। जांच 2 महीने में पूरी, आरोपपत्र के बाद विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में 3 महीने में ट्रायल। विशेष लोक अभियोजक, सेंट्रल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की व्यवस्था। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि 2024 के कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं में भी कमी आई है। सिंह ने कहा, “यह संशोधन केवल सजा बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाने का कदम है। सरकार पिछले अनुभवों से सीखकर कानून को मजबूत कर रही है।”
सदन में हंगामा क्यों हुआ?
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण ने सबसे ज्यादा विवाद पैदा किया। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन (नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ) को युवाओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति बताया। राहुल ने कहा, “छात्रों का आंदोलन गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं, बल्कि देश के युवाओं की चिंताओं की आवाज है। हर राजनीतिक दल, यहां तक कि भाजपा को भी छात्रों की बात सुननी चाहिए। युवाओं ने जो किया, उसमें कुछ भी गलत नहीं था। हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।”
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को महंगा और परीक्षा-केंद्रित बताते हुए कहा कि छात्र सिर्फ परीक्षा नहीं, पूरी प्रणाली में बदलाव चाहते हैं। एक छात्रा की बात दोहराते हुए उन्होंने ‘स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन शब्दों को असंसदीय बताते हुए कार्यवाही से हटाने की मांग की। अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि असंसदीय शब्द स्वतः हटा दिए जाएंगे। सबसे तीखा टकराव राहुल गांधी के गृह मंत्री अमित शाह पर आरोपों से हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर गोलीबारी/पैलेट गन का आदेश अमित शाह ने दिया। राहुल ने कहा, “गृह मंत्री छात्रों पर गोली चलाने का आदेश देकर उनके खून में पैलेट डाल रहे हैं। वे डर के कारण सदन में नहीं आए।” इस पर रिजिजू ने जोरदार आपत्ति जताई और कहा, “यह गंभीर और झूठा आरोप है। सबूत दिखाएं वरना माफी मांगनी पड़ेगी।” सरकार ने स्पष्ट किया कि कोई गोली नहीं चली, सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ और ऐसा आदेश मजिस्ट्रेट देता है, मंत्री नहीं।
नेताओं और आम जनता की प्रतिक्रियाएं
सरकार/सत्ता पक्ष: जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसदों ने विधेयक को युवाओं के भविष्य की रक्षा वाला बताया। सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं ने लिखा, “अब पेपर लीक माफिया की खैर नहीं। विपक्ष हंगामा कर युवा-विरोधी मानसिकता दिखा रहा है।”
विपक्ष: कांग्रेस और अन्य दलों ने बिल को ‘कॉस्मेटिक’ और ‘बैंड-एड’ बताया। उन्होंने कहा कि सजा बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी, शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव चाहिए। छात्रों के आंदोलन को दबाने की आलोचना जारी रही।
आम जनता और छात्र: सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कई छात्रों और अभिभावकों ने सख्त कानून का स्वागत किया और कहा कि इससे परीक्षा माफिया पर लगाम लगेगी। कुछ युवा समूहों ने कहा कि बिल अच्छा है लेकिन जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और नीट रद्द होने जैसी घटनाओं पर जवाबदेही भी जरूरी है। कई यूजर्स ने लिखा, “कानून सख्त हो लेकिन लागू भी सख्ती से हो।” विधेयक अब राज्यसभा में जाएगा। सरकार का दावा है कि यह परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाएगा, जबकि विपक्ष शिक्षा सुधारों की व्यापक मांग पर अड़ा हुआ है।

