Dehradun Bridge Collapse Rain: 16 करोड़ का नया पुल चालू होने के महज 16 दिन में धंसी अप्रोच रोड, बारिश ने खोली निर्माण की पोल; लोग बोले- ‘रिस्की है, गुप्त गुफा खुल गई’

Dehradun Bridge Collapse Rain: देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बार फिर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रेमनगर और नंदा की चौकी के बीच टौंस नदी पर बने 16 करोड़ रुपये की लागत वाले नए पुल की अप्रोच रोड भारी बारिश के कारण धंस गई। यह पुल 12 जुलाई 2026 को यातायात के लिए खोला गया था और महज 16-17 दिनों में ही पहली तेज बारिश ने इसकी हकीकत सामने रख दी।

सोमवार रात (27 जुलाई) से शुरू हुई लगातार भारी बारिश के बाद मंगलवार सुबह सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। मौके पर एक विशाल गड्ढा बन गया, जिसे देखकर कई लोगों ने कहा कि ‘मानो कोई गुप्त गुफा खुल गई हो’। वायरल हो रहे वीडियो में पुल के पास बड़ी दरार और मिट्टी का खुला हिस्सा साफ दिख रहा है। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत मौके पर पहुंचकर लोगों को रोक दिया और रास्ता बंद कर दिया। यह पुल देहरादून-पांवटा साहिब राजमार्ग पर स्थित है, जो पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले यातायात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इससे पहले सितंबर 2025 में पुराना पुल भी मानसून की बारिश में ध्वस्त हो गया था। उसके बाद लगभग 10 महीने में 16 करोड़ रुपये खर्च कर नया पुल बनाया गया था।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि पुल की संरचनात्मक डिजाइन पूरी तरह सुरक्षित है। अप्रोच रोड में बने गड्ढे को तीन-चार घंटे में भर दिया जाएगा और सड़क यातायात के लिए खोल दी जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर संबंधित विभाग ने युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम शुरू किया। शाम तक सड़क को दोबारा यातायात के लिए खोल दिया गया। पीटीआई के अनुसार, सिंकहोल को 12 घंटे के अंदर ठीक कर लिया गया। सोशल मीडिया पर इस घटना ने तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कीं। कई यूजर्स ने लिखा- “इतने पैसे लगाने के बाद भी इतने बड़े गड्ढे? भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए।” कुछ ने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी यह पुल टूटा था, अस्थायी व्यवस्था भी बार-बार फेल हुई और अब नया बना तो पहली बारिश में ही अप्रोच रोड धंस गई।

उधर, उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है क्योंकि कई जगहों पर लैंडस्लाइड और मलबा गिरने से रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं। केदारनाथ हाईवे पर भी चट्टानें गिरने की घटनाएं हुई हैं। यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मानसून के दौरान रखरखाव को लेकर फिर से चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासन का दावा है कि मुख्य पुल सुरक्षित है और अस्थायी क्षति को तुरंत दूर कर लिया गया, लेकिन आम लोगों में इस रास्ते से गुजरने को लेकर आशंका बनी हुई है।

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