Greater Noida electric bus empty: ग्रेटर नोएडा-नोएडा में इलेक्ट्रिक बसें खाली दौड़ रही हैं, 40 दिनों में 1.19 करोड़ का नुकसान; रूट सर्वे शुरू, नए मार्गों की तैयारी

Greater Noida electric bus empty: ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्ध नगर में इलेक्ट्रिक बस सेवा का सपना यात्रियों तक पहुंच ही नहीं पा रहा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने के उद्देश्य से 12 जून 2026 को शुरू की गई यह सेवा अभी भी संघर्ष कर रही है। घनी आबादी वाले सेक्टरों से दूर तय किए गए रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें ज्यादातर खाली दौड़ रही हैं, जिससे तीनों प्राधिकरणों (नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) को पहले ही महीने में करीब 1.19 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के साथ मिलकर शुरू की गई इस सेवा में कुल 100 इलेक्ट्रिक बसें (जिनमें डबल डेकर भी शामिल) उतारी गईं। इनमें नोएडा में 50, ग्रेटर नोएडा में 25 और यमुना सिटी में 25 बसें शामिल हैं। 40 दिनों के आंकड़ों के मुताबिक कुल 83,701 यात्रियों ने ही इन बसों का उपयोग किया, यानी औसतन प्रतिदिन मात्र 2,090 यात्री। प्रति बस औसत 20-21 यात्री ही मिल रहे हैं, जो क्षमता से काफी कम है।

क्षेत्रवार स्थिति:

ग्रेटर नोएडा: 25 बसों पर प्रतिदिन औसतन 331 यात्री (प्रति बस 13 यात्री)।
नोएडा: प्रतिदिन औसतन 1,004 यात्री (प्रति बस 20 यात्री)।
यमुना सिटी: सबसे बेहतर प्रदर्शन — प्रतिदिन 758 यात्री (प्रति बस 30 यात्री), 10 लाख से अधिक राजस्व। नोएडा में बुधवार को चलती एक ई-बस में कई सीटें खाली दिखीं, जो समस्या की तस्वीर साफ करती है।

मुख्य समस्या क्या है?
तीनों प्राधिकरणों ने 19 रूट तय किए, लेकिन ज्यादातर मार्ग घनी आबादी वाले सेक्टरों, कॉलोनियों और किरायेदारों वाले इलाकों से नहीं गुजरते। बस स्टॉप कम हैं, समय-सारणी और रूट की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच रही। परिणामस्वरूप यात्री बसों से जुड़ नहीं पा रहे।

यात्रियों और अधिकारियों की राय:
अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा ने कहा, “शहर में चल रही बसों के समय और रूट की अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं है। बस स्टॉप कम होने और जानकारी चस्पा न होने के कारण यात्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा।”

एनजी रवि, सीईओ ग्रेनो ने बताया, “ग्रेटर नोएडा में रूटों का सर्वे शुरू कराया गया है। अधिक आबादी और किरायेदारों वाले इलाकों के लिए नए रूट शुरू होंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में भी सर्वे कर बसों के फेरे बढ़ाने की तैयारी है।”

राकेश त्रिपाठी, सेक्टर-22डी यीडा ने रूट नंबर-2 पर बदलाव की मांग की।

राजेश कुमार, एसीईओ यीडा ने यमुना सिटी के बेहतर प्रदर्शन का जिक्र करते हुए यात्रियों को बसों से जोड़ने के लिए कार्ययोजना शुरू करने की जानकारी दी।

भविष्य की योजना:
प्राधिकरण अब सक्रिय हो गए हैं। ग्रेटर नोएडा में 30 सदस्यीय टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है। नए रूट जोड़े जा रहे हैं, जिनमें बॉटनिकल गार्डन से परी चौक, जेवर एयरपोर्ट, गाजियाबाद आदि शामिल हैं। कुछ स्टॉपेज हटाए और नए जोड़े गए हैं। रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग भी शुरू की जा रही है। कुल मिलाकर 500 इलेक्ट्रिक बसों की बड़ी योजना अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। किराया 20 से 50 रुपये रखा गया है, जो किफायती है। बसों में CCTV, चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं हैं। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि जागरूकता बढ़ाने, रूट सुधारने और फीडबैक के आधार पर यात्री संख्या बढ़ेगी। यह सेवा न केवल पर्यावरण अनुकूल है बल्कि ट्रैफिक जाम कम करने और जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बशर्ते रूट प्लानिंग और प्रचार पर तुरंत ध्यान दिया जाए। प्राधिकरणों की सक्रियता से उम्मीद है कि जल्द ही यह सेवा सफलता की कहानी बनेगी।

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