दिल्ली छात्र आंदोलन: राहुल गांधी के उतरने से आंदोलन को मिली नई धार, पुलिस कार्रवाई और पत्थरकांड पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में छात्रों का आंदोलन अब राजनीतिक और राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और अब विपक्षी दल भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित अन्य नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर प्रदर्शन किया। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की आवाज़ दबाने के बजाय उनकी मांगों को सुना जाना चाहिए। इस बीच आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सोमवार को हुए लाठीचार्ज में छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। इसके बाद से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनका जवाब मांगने की बात कही जा रही है।

पत्थर कहां से आए? सबसे बड़ा सवाल

प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल कथित पत्थरबाजी को लेकर उठ रहा है। आंदोलन में शामिल कई छात्रों का दावा है कि जिस इलाके में भारी पुलिस सुरक्षा तैनात थी, वहां बड़ी मात्रा में पत्थर आखिर पहुंचे कैसे। कुछ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटनास्थल के पास पत्थरों से भरे वाहन या निर्माण सामग्री मौजूद होने की चर्चा है, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सादे कपड़ों में डंडा लिए लोग कौन थे?

प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप भी लगाया है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोग जींस-टीशर्ट जैसे सामान्य कपड़ों में डंडे लेकर छात्रों पर हमला करते दिखाई दिए। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि इन व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वे पुलिस बल का हिस्सा थे, किसी अन्य एजेंसी से जुड़े थे या आम नागरिक थे। फिलहाल इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

नेम प्लेट गायब होने पर भी उठे सवाल

छात्रों और विपक्षी नेताओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि कार्रवाई के दौरान मौजूद कई पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नाम-पट्टिका (नेम प्लेट) दिखाई नहीं दे रही थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए, क्योंकि पहचान छिपाने के आरोप पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े प्रश्न खड़े करते हैं।

विपक्ष ने मांगी निष्पक्ष जांच

राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुलिस कार्रवाई में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या किसी बाहरी तत्व की भूमिका रही है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकार और पुलिस का पक्ष भी अहम

दूसरी ओर, पुलिस और सरकार की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल राजधानी में आंदोलन जारी है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं विपक्ष के समर्थन से आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम मिल गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल और तेज होने के संकेत हैं।

यह भी पढ़ें: Jantar Mantar Protest: दिल्ली में छात्रों का आंदोलन तेज, मदद के लिए आगे आए कई अनजान चेहरे

यहां से शेयर करें