Sonam Wangchuk fast termination conditions: नई दिल्ली, लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने आज (20 जुलाई) अपने 23 दिन लंबे अनशन को समाप्त करने की इच्छा जताई है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार से तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं। अस्पताल में लिखे एक हस्तलिखित नोट में वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था में हालिया विफलताओं, खासकर नीट पेपर लीक के लिए सरकार से जवाबदेही मांगी है। वांगचुक, जो 28 जून से जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में शामिल होकर अनशन पर थे, 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने इसे “अवैध हिरासत” बताया है, जहां उनकी आवाजाही, बोलने और संचार की स्वतंत्रता सीमित है। नोट में उन्होंने लिखा: “अनशन 20 जुलाई के बाद समाप्त होगा, बशर्ते निम्नलिखित में से कोई एक शर्त पूरी हो…”
तीन शर्तें इस प्रकार हैं:
केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (नीट पेपर लीक आदि) की जवाबदेही स्वीकार करे। सीजेपी नेतृत्व के साथ वांगचुक संसद पहुंचें और विभिन्न दलों के सांसद/नेता आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। स्वास्थ्य या अन्य कारणों से संसद मार्च में शामिल न हो सकें तो सांसद अस्पताल आएं और ऊपर बताए आश्वासन दें। यह घोषणा मानसून सत्र के पहले दिन और सीजेपी के “चलो संसद” मार्च के साथ आई है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो ने भी अस्पताल से समर्थकों से मार्च को सफल बनाने की अपील की थी।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें:
इस बीच, सीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और मेमोरेंडम सौंपा। मुख्य मांगें हैं, सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई। शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा। नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा। नड्डा ने मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि चर्चा जारी है। हालांकि, मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों में आक्रोश है।
पृष्ठभूमि:
सीजेपी का आंदोलन जून 2026 में नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुआ। इसमें धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए पर सवाल और परीक्षा सुधार की मांगें शामिल हैं। वांगचुक 28 जून को शामिल हुए और लद्दाख की राज्यhood, पर्यावरण व सांस्कृतिक मुद्दों को भी जोड़ा। अनशन के दौरान उन्होंने छात्रों की आत्महत्याओं (करीब 20 रिपोर्टेड) पर गहरी चिंता जताई थी। वांगचुक ने पहले कहा था कि यह उनका छठा अनशन है और “छह हफ्ते या मौत” तक जारी रखने को तैयार हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल शिफ्टिंग पर सुनवाई हुई है।
प्रभाव और प्रतिक्रिया:
यह आंदोलन पूरे देश में छात्रों, युवाओं और शिक्षा सुधारकों के बीच व्यापक समर्थन जुटा रहा है। विपक्षी दल भी संसद में मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे। अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन सीजेपी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है। अपडेट्स के लिए बने रहें।
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