हापुड़ में सर्राफा दुकान पर तेजाब कांड: पानी समझकर पी लिया केमिकल, टीचर की हालत गंभीर, पुलिस जांच में जुटी

हापुड़ में सर्राफा दुकान पर तेजाब कांड: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। हापुड़ जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित अर्जुन नगर मोहल्ले में एक सर्राफा दुकान पर हुई घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। यहां एक निजी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका रिया, जेवर खरीदने के दौरान पानी समझकर तेजाब जैसा खतरनाक रसायन पी बैठी। घटना के बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है।

कैसे हुआ हादसा

घटना 10 जुलाई की शाम की है, जब रिया अपनी मां अंजना राघव के साथ मोहल्ले की एक सर्राफा दुकान पर आभूषण खरीदने पहुंची थीं। खरीदारी के दौरान उन्हें प्यास लगी, जिस पर दुकानदार ने पास की एक कंफेक्शनरी/जनरल स्टोर से ठंडी सीलबंद पानी की बोतल मंगवाई। जैसे ही रिया ने बोतल से एक घूंट पिया, उनके गले में तेज जलन होने लगी और कुछ ही पलों में उनकी तबीयत बिगड़ गई। रिया ने बाद में खुद बताया कि दो घूंट पीते ही उन्हें अहसास हुआ कि यह पानी नहीं बल्कि तेजाब जैसा कोई पदार्थ है। इसके तुरंत बाद मुंह से झाग आने लगे और स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में परिजनों को सूचित किया और रिया को पहले एक स्थानीय निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें मेरठ के गढ़ रोड स्थित आनंद अस्पताल रेफर किया गया।

पेट और आंतों में हुए छाले

इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, तेजाब जैसा पदार्थ पीने से रिया के पेट और आंतों में छाले पड़ गए हैं। हालांकि पांच दिन बाद अब उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है और जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है। घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है, जिसमें बोतल से पेय पदार्थ पीते ही रिया की तबीयत बिगड़ती दिखाई देती है।

बोतल में कैसे पहुंचा तेजाब? जांच में जुटी पुलिस

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीलबंद ब्रांडेड पानी की बोतल में तेजाब जैसा पदार्थ आखिर कैसे पहुंचा। रिया की मां अंजना राघव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए इसकी गहन जांच की मांग की है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि गलती से पानी की जगह तेजाब वाली बोतल दे दी गई, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका कि बोतल असल में सीलबंद थी या पहले से खुली हुई, और तेजाब उसमें कैसे पहुंचा। पुलिस सर्राफा व्यापारी, जनरल स्टोर संचालिका और बोतल लाने वाले किशोर से पूछताछ कर रही है। बोतल में मौजूद संदिग्ध तरल पदार्थ को वैज्ञानिक जांच (फोरेंसिक लैब) भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही असली सच्चाई सामने आ सकेगी। जनरल स्टोर संचालिका का कहना है कि उनकी दुकान पर किसी तरह के तेजाब की बिक्री नहीं होती और बोतल पूरी तरह सीलबंद व सामान्य दिख रही थी, इसलिए किसी को शक नहीं हुआ।

पैकेज्ड वाटर की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने बाजार में मिलने वाले सीलबंद/पैकेज्ड पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जगहों पर पुरानी प्लास्टिक बोतलों को दोबारा इस्तेमाल कर, नकली सील लगाकर बेचा जाता है, जिससे केमिकल अंश रह जाने का खतरा बना रहता है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि बोतल खोलते ही उसे सूंघकर देखें और किसी भी असामान्य गंध या स्वाद पर तुरंत पीना बंद कर दें। फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के दायरे में है और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह हादसा लापरवाही से हुआ या इसके पीछे कोई और वजह है।

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